बुधवार को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और IISc बेंगलुरु के निदेशक प्रोफेसर जी. रंगराजन सहित संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के बीच उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ को विज्ञान, तकनीक, उच्च शिक्षा और चिकित्सा अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए तीन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
तीन बड़ी परियोजनाओं पर बनी रूपरेखा
1. विश्वस्तरीय मटेरियल टेस्टिंग सेंटर
प्रदेश में आधुनिक मटेरियल कैरेक्टराइजेशन एंड टेस्टिंग फैसिलिटी स्थापित करने का प्रस्ताव है। यहां माइक्रोस्कोपी, एक्स-रे आधारित विश्लेषण, नैनो टेक्नोलॉजी, उच्च तापमान परीक्षण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित वैज्ञानिक विश्लेषण जैसी सुविधाएं विकसित करने की परिकल्पना है।
प्रस्तावित केंद्र में लगभग 600 शोधार्थियों और विद्यार्थियों के आवासीय प्रशिक्षण की क्षमता होगी। तीन वर्षों में करीब 1800 विद्यार्थियों को उन्नत वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।
2. विज्ञान और गणित के शिक्षक तैयार करने की योजना
दूसरी परियोजना के तहत चार वर्षीय एकीकृत बीएससी-बीएड पाठ्यक्रम संचालित करने वाले विशेष संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव है। इसमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गणित की पढ़ाई के साथ आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर जोर दिया जाएगा।
प्रस्तावित संस्थान में 14 आधुनिक प्रयोगशालाएं, 600 विद्यार्थियों की आवासीय क्षमता, डिजिटल लाइब्रेरी और 25 पूर्णकालिक शिक्षकों की व्यवस्था की योजना है।
3. चिकित्सा अनुसंधान में AI और डिजिटल हेल्थ को बढ़ावा
तीसरी परियोजना चिकित्सा अनुसंधान और स्वास्थ्य तकनीक से जुड़ी है। इसके अंतर्गत AI आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों, किफायती जांच तकनीक, डिजिटल हेल्थ और क्लिनिकल रिसर्च को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
IISc के मेडिकल स्कूल की विशेषज्ञता को प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ने के लिए हब एंड नेटवर्क मॉडल पर भी विचार किया गया।
बस्तर और सरगुजा के युवाओं को मिलेगा वैज्ञानिक प्रशिक्षण का अवसर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण का लाभ केवल रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बस्तर, सरगुजा और अन्य जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों के प्रतिभाशाली युवाओं को भी आधुनिक प्रयोगशालाओं और प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रशिक्षण के अवसर मिलने चाहिए।
इसके लिए रिसर्च इंटर्नशिप, विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, वैज्ञानिकों के व्याख्यान और आधुनिक प्रयोगशालाओं में काम करने के अवसर विकसित करने पर चर्चा हुई। सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जैव प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षित करने की योजना भी शामिल है।
बिना बिजली के पानी पहुंचाने की तकनीक पर भी मंथन
बैठक में बस्तर और सुकमा जैसे दूरस्थ इलाकों की पेयजल समस्या के समाधान पर भी चर्चा हुई। IISc के वैज्ञानिकों ने जल प्रवाह की ऊर्जा से संचालित हाइड्रोलिक रैम और टरबाइन पंप जैसी तकनीकों की जानकारी दी। इन तकनीकों के जरिए पारंपरिक बिजली के बिना भी जलापूर्ति की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं।
अधिकारियों को व्यवहार्यता जांचने के निर्देश
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने संबंधित अधिकारियों को तीनों परियोजनाओं की तकनीकी, वित्तीय और संस्थागत व्यवहार्यता का परीक्षण कर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि, फिलहाल ये परियोजनाएं प्रस्ताव और विचार-विमर्श के चरण में हैं। यदि इन्हें धरातल पर उतारा जाता है तो छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवाओं के लिए विज्ञान एवं तकनीकी अनुसंधान के नए रास्ते खुल सकते हैं।








