रायपुर। बॉलीवुड अभिनेता सनी देओल की आगामी फिल्म ‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ रिलीज से पहले विवादों में घिर गई है। फिल्म के प्रमोशनल कंटेंट और कुछ दृश्यों को लेकर छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के चेयरमैन डॉ. अभिजात चंद्रकांत शेठ और सचिव डॉ. राघव लैंगर को कानूनी नोटिस भेजकर डॉक्टरों की सुरक्षा और चिकित्सा पेशे की गरिमा को लेकर सवाल उठाए हैं।

डॉक्टरों को लेकर फिल्म के दृश्यों पर आपत्ति

छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी का आरोप है कि फिल्म के प्रमोशनल कंटेंट में पूरे चिकित्सा क्षेत्र को भ्रष्ट और अनैतिक तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है। संगठन ने विशेष रूप से डॉक्टरों के खिलाफ अभद्र भाषा, गाली-गलौज और उन्हें गोली मारने जैसे हिंसक दृश्यों पर आपत्ति जताई है।

सोसायटी का कहना है कि इस तरह के दृश्य समाज में डॉक्टरों के प्रति नकारात्मक धारणा पैदा कर सकते हैं। पहले से ही देश के अलग-अलग हिस्सों में चिकित्सकों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसे माहौल में इस तरह की फिल्मी प्रस्तुति डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन सकती है।

NMC की भूमिका पर भी उठाए सवाल

सिविल सोसायटी ने केवल फिल्म के कंटेंट पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जाहिर की है। संगठन का आरोप है कि डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा और दुर्व्यवहार की घटनाओं को रोकने के लिए आयोग की ओर से अपेक्षित प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं।

नोटिस में मांग की गई है कि NMC केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों को डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त एडवाइजरी जारी करे। साथ ही मौजूदा कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी पहल की जाए।

सेंसर बोर्ड से हस्तक्षेप की मांग

फिल्म ‘सूर्या: अंत से आरंभ तक’ के विवादित दृश्यों और प्रमोशनल सामग्री पर रोक लगाने के लिए छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और संबंधित कानूनी मंचों पर हस्तक्षेप की मांग की है।

संगठन का मानना है कि फिल्मी स्वतंत्रता के नाम पर किसी पूरे पेशे की छवि को इस तरह प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए, जिससे उस पेशे से जुड़े लोगों की सुरक्षा और सम्मान प्रभावित होने की आशंका हो।

कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट पहुंचेगी सिविल सोसायटी

डॉ. कुलदीप सोलंकी ने चेतावनी दी है कि यदि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की ओर से इस मामले में ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। जरूरत पड़ने पर जनहित याचिका (PIL) दायर करने सहित अन्य कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा।

नोटिस में NMC के चेयरमैन और सचिव से अपना पक्ष रखने तथा अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी देने की मांग भी की गई है।