रायपुर। कार्तिक अमावस्या की रात घर की देहरी पर रखा मिट्टी का दीया दीपावली की सबसे पहचानी जाने वाली तस्वीर है। इस बार दीपावली रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। छत्तीसगढ़ में इसे कई जगह ‘देवारी तिहार’ कहा जाता है। यहाँ दीपों और लक्ष्मी पूजन के साथ सुआ गीत और गौरा-गौरी जैसी लोक परंपराएँ भी इस त्योहार का हिस्सा हैं। छत्तीसगढ़ शासन का अवकाश कैलेंडर

दिवाली क्यों मनाते हैं?

उत्तर भारत की लोकप्रिय रामकथा परंपरा में दीपावली को श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुशी से जोड़ा जाता है। लोकमान्यता है कि अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में दीप जलाए। इस कथा में दीये की लौ अंधकार पर प्रकाश और अन्याय पर न्याय की जीत का प्रतीक है। स्मिथसोनियन का रामकथा संदर्भ

लक्ष्मी पूजा क्यों शुभ मानी जाती है?

हिंदू परंपरा में माँ लक्ष्मी धन, अन्न और समृद्धि से जुड़ी हैं। इसी मान्यता के साथ परिवार घर की सफाई करते हैं, देहरी पर रंगोली बनाते हैं और शाम को दीप जलाकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कुछ व्यापारिक समुदायों में यह समय नई बही खोलने और नए कारोबारी वर्ष की शुरुआत से भी जुड़ा है। स्मिथसोनियन का दीपावली संदर्भ

इतिहास में दीपावली का उल्लेख

‘दीपावली’ का अर्थ है दीपों की पंक्ति। 11वीं सदी में विद्वान अल-बिरूनी ने भारत के रीति-रिवाजों पर लिखे अपने ग्रंथ में दीपावली का उल्लेख किया। उनका वर्णन बताता है कि यह पर्व सदियों पहले भी मनाया जाता था। आज भी इसकी कथाएँ और रीति-रिवाज क्षेत्र और समुदाय के हिसाब से अलग-अलग हैं। सहपीडिया का ऐतिहासिक संदर्भ

छत्तीसगढ़ की देवारी में खेत और आँगन की परंपराएँ

प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में नई फसल की धान की बालियों से देहरी सजाने और चावल के घोल से आँगन में चौक पूरने की परंपरा है। दीपावली के आसपास सुआ गीत गाए जाते हैं और गौरा-गौरी उत्सव में शिव-पार्वती की पूजा होती है। गोवर्धन पूजा और मातर की परंपराएँ इस पर्व को खेती और पशुधन से भी जोड़ती हैं। भारत सरकार का पर्यटन पोर्टल

जोहार न्यूज़ परिवार की ओर से आप सभी को शुभ दीपावली। आपके घर में सुख-समृद्धि रहे और यह त्योहार अपनों के साथ खुशियाँ बाँटने का अवसर बने।