धनतेरस दीपावली से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। सोना-चांदी और बर्तनों के साथ नई झाड़ू खरीदने की परंपरा भी कई परिवारों में प्रचलित है। आखिर झाड़ू को शुभ क्यों माना जाता है?
झाड़ू खरीदने की परंपरा क्यों है?
हिंदू लोकमान्यताओं में झाड़ू घर की स्वच्छता और सुव्यवस्था का प्रतीक है। देवी लक्ष्मी को समृद्धि से जोड़ा जाता है, इसलिए दीपावली से पहले घर की विशेष सफाई की जाती है। लोकविश्वास के अनुसार नई झाड़ू खरीदना गंदगी और दरिद्रता दूर करने का प्रतीक है। लेकिन इस परंपरा की सटीक ऐतिहासिक शुरुआत का सर्वमान्य दस्तावेजी प्रमाण नहीं है।
क्या झाड़ू से सचमुच धन बढ़ता है?
यह आस्था और प्रतीकात्मक मान्यता है। नई झाड़ू खरीदने से धन बढ़ने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। हां, स्वच्छ घर और अच्छी साफ-सफाई स्वास्थ्य और सुविधा के लिए लाभकारी हैं।
धनतेरस और भगवान धन्वंतरि
धनतेरस को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है और इसे कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी से जोड़ा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। धन्वंतरि आयुर्वेद और आरोग्य से जुड़े हैं। इसलिए पर्व स्वास्थ्य एवं समृद्धि, दोनों के महत्व को दर्शाता है।
क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
सोना-चांदी समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। नई झाड़ू स्वच्छता का प्रतीक है। पीतल, तांबे या अन्य घरेलू उपयोग के बर्तन कई परिवार खरीदते हैं। मिट्टी के दीये, पूजा की सामग्री और कुछ क्षेत्रों में साबुत धनिया भी खरीदा जाता है। महंगी वस्तु खरीदना धार्मिक अनिवार्यता नहीं है।
क्या नहीं खरीदने की लोकमान्यता है?
कुछ परिवार धनतेरस पर लोहे का सामान, कैंची-चाकू जैसे धारदार उपकरण, काली वस्तुएं या कांच के सामान की खरीदारी टालते हैं। यह क्षेत्रीय धार्मिक परंपरा है, सार्वभौमिक निषेध या विज्ञान पर आधारित नियम नहीं। कुछ घरों में नए बर्तन खाली न रखने की मान्यता भी है।
सोना खरीदते समय सावधानी
सोने के आभूषण खरीदते समय BIS हॉलमार्क, HUID, वजन, बिल, शुद्धता और मेकिंग चार्ज जांचना चाहिए। HUID को BIS Care ऐप से सत्यापित किया जा सकता है।
सबसे जरूरी संदेश
त्योहार की खुशी के लिए कर्ज लेकर अनावश्यक खरीदारी न करें। धनतेरस के सांस्कृतिक संदेश में आरोग्य, स्वच्छता, सुव्यवस्था और आर्थिक समझदारी भी शामिल हैं।








