सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब समिति ने पूरी पेनल्टी निर्धारित की थी, तो फिर 25 लाख 91 हजार 24 रुपये की राशि कम जमा होने के बावजूद नियमितीकरण की कार्रवाई कैसे पूरी हो गई? क्या नियमों में कोई विशेष छूट दी गई थी या फिर अधिकारियों ने अपने स्तर पर ही राहत दे दी?
2039.77 वर्गमीटर अवैध निर्माण का मामला
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, श्रीराम केयर अस्पताल का कुल भूखंड 3683.45 वर्गमीटर है। इसमें 3436.40 वर्गमीटर निर्माण की अनुमति मिली थी। लेकिन जांच में अस्पताल परिसर में 2039.77 वर्गमीटर अतिरिक्त अवैध निर्माण का मामला सामने आया। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने छत्तीसगढ़ अनधिकृत विकास का नियमितीकरण अधिनियम संशोधन 2022 की धारा-6 के तहत निर्माण को नियमित कराने के लिए आवेदन किया था।
कलेक्टर-एसपी वाली समिति ने तय की थी 76.73 लाख की पेनल्टी
मामले में जिला स्तरीय नियमितीकरण प्राधिकारी समिति की बैठक में अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए 76 लाख 73 हजार 225 रुपये का आर्थिक दंड निर्धारित किया गया था। इस समिति में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, नगर निगम आयुक्त और टीएंडसीपी के संयुक्त संचालक सहित संबंधित अधिकारी शामिल होते हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब समिति ने पूरी पेनल्टी तय की थी, तो बाद में निर्धारित राशि से करीब 25.91 लाख रुपये कम लेकर नियमितीकरण की कार्रवाई किस आधार पर पूरी की गई?
मार्च 2024 में जमा हुआ चालान, फिर भी उठ रहे सवाल
रिपोर्ट में उल्लेखित दस्तावेजों के मुताबिक, मार्च 2024 में अस्पताल प्रबंधन की ओर से 50 लाख 82 हजार 201 रुपये का चालान जमा किया गया। इसके बाद टीएंडसीपी के जिम्मेदार अधिकारी द्वारा नियमितीकरण की कार्रवाई पूरी किए जाने का उल्लेख है।
यदि निर्धारित पेनल्टी की पूरी राशि जमा नहीं हुई थी, तो क्या नियमितीकरण से पहले संशोधित आदेश जारी किया गया था? क्या सक्षम समिति ने अपनी पूर्व निर्धारित पेनल्टी में बदलाव किया था? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग से सामने आना जरूरी है।
25.91 लाख रुपये का नुकसान किसकी जिम्मेदारी?
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू शासन के राजस्व से जुड़ा है। यदि 76.73 लाख रुपये की पेनल्टी निर्धारित की गई थी और केवल 50.82 लाख रुपये ही जमा हुए, तो शेष 25.91 लाख रुपये की वसूली क्यों नहीं हुई? क्या शासन को निर्धारित राजस्व से वंचित किया गया? और यदि किसी नियम के तहत छूट दी गई, तो उसका आदेश और आधार सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?
सीएम पोर्टल तक पहुंच सकता है मामला
मामले से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद अब इसकी शिकायत मुख्यमंत्री जनदर्शन अथवा सीएम पोर्टल पर किए जाने की बात कही जा रही है। शिकायत के माध्यम से जिला स्तरीय समिति के निर्णय, टीएंडसीपी की भूमिका, पेनल्टी निर्धारण और वास्तविक जमा राशि की जांच की मांग उठाई जा सकती है।
फिलहाल इस पूरे प्रकरण में संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष और नियमितीकरण के अंतिम आदेश की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। अब देखना होगा कि शासन इस मामले में जांच कराता है या फिर लाखों रुपये की पेनल्टी के अंतर से जुड़े सवाल फाइलों में ही दबकर रह जाते हैं।








