वर्तमान में बिलासपुर में थे पदस्थ
जानकारी के मुताबिक, एलपी डाहिरे पूर्व में मुंगेली जिले में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। वर्तमान में वे संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बिलासपुर के कार्यालय में सहायक संचालक के पद पर पदस्थ थे।
स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर से जारी आदेश के अनुसार, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9 (1) (क) के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
परिवार पेंशन नहीं मिलने से हाईकोर्ट पहुंचा था मामला
दरअसल, पूरा मामला राजेश्वरी त्रिपाठी के परिवार पेंशन प्रकरण से जुड़ा हुआ है। उनके पति की मृत्यु के बाद भी उन्हें परिवार पेंशन का लाभ नहीं मिल पाया था। इसके बाद उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर न्याय की गुहार लगाई थी।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग को अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए कई अवसर दिए, लेकिन इसके बावजूद विभाग की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया। इस पर न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
स्कूल शिक्षा सचिव को भी किया गया था तलब
न्यायालय के निर्देशों के बावजूद जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर तलब किया था। साथ ही विभाग को शपथ पत्र के साथ यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया था कि निर्धारित अवसर मिलने के बावजूद न्यायालय में जवाब क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया।
हाईकोर्ट की सख्ती के बाद विभाग ने पेंशन प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
पहले भी 6 कर्मचारी हो चुके हैं निलंबित
इस पूरे मामले में इससे पहले छह कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है। इनमें दो प्राचार्य भी शामिल बताए गए हैं। अब इसी प्रकरण में पूर्व प्रभारी DEO और वर्तमान सहायक संचालक एलपी डाहिरे पर भी निलंबन की कार्रवाई की गई है।
बिलासपुर DEO कार्यालय रहेगा मुख्यालय
निलंबन अवधि के दौरान एलपी डाहिरे का मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बिलासपुर निर्धारित किया गया है। उन्हें सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। इस अवधि में उन्हें मूलभूत नियम 53 के तहत नियमानुसार निर्वाह भत्ता मिलेगा।
इसके अलावा लोक शिक्षण संचालनालय को उनके विरुद्ध आरोप पत्र तैयार करने के लिए आवश्यक अभिलेख, आरोपों के समर्थन में अभिकथन और गवाहों की सूची सहित पूरा प्रकरण 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।








