ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा के साथ धोखे का जोखिम भी जुड़ा है। बेहद सस्ते ऑफर दिखाकर पैसे लेने वाले फर्जी विक्रेता ग्राहकों को नुकसान पहुंचाते हैं। दूसरी ओर, ग्राहक बनकर झूठे ऑर्डर और गलत रिफंड दावे करने वाले लोग दुकानदारों की कमाई पर चोट करते हैं। भरोसा बचाने के लिए दोनों पक्षों की सुरक्षा जरूरी है।
सस्ता ऑफर, महंगा नुकसान
अनजान वेबसाइट या सोशल मीडिया पेज पर बाजार से बहुत कम कीमत देखकर तुरंत भुगतान करना जोखिम भरा हो सकता है। पैसे मिलने के बाद सामान न भेजना, गलत वस्तु देना या संपर्क बंद कर देना धोखे के तरीके हैं। केवल आकर्षक तस्वीरें और अच्छी टिप्पणियां भरोसे का प्रमाण नहीं हैं।
खरीदने से पहले विक्रेता की पहचान, संपर्क विवरण, रिटर्न नीति और प्लेटफॉर्म की शिकायत व्यवस्था जांचें। अनजान लिंक पर बैंक जानकारी न दें। रिफंड लेने के लिए UPI PIN डालना या OTP बताना जरूरी नहीं होता।
जब खरीदार की तरफ से हो धोखा
जानबूझकर फर्जी कैश ऑन डिलीवरी यानी COD ऑर्डर करना, गलत पता देना, बार-बार बिना वास्तविक खरीद इरादे के डिलीवरी ठुकराना, रिटर्न में सामान बदल देना या झूठा रिफंड मांगना विक्रेताओं को नुकसान पहुंचा सकता है। पैकिंग, आने-जाने की शिपिंग और समय का खर्च छोटे कारोबारियों के लिए खास तौर पर भारी पड़ता है।
लेकिन हर COD रद्द होना या डिलीवरी से इनकार धोखाधड़ी नहीं है। गलत, खराब या विवरण से अलग सामान लौटाना ग्राहक का वैध अधिकार है। इरादे और उपलब्ध प्रमाण देखे बिना किसी खरीदार को ठग कहना गलत होगा।
प्रमाण रखें, शिकायत सही जगह करें
ग्राहक ऑर्डर, भुगतान रसीद, बातचीत और पैकेट की तस्वीरें सुरक्षित रखें। दुकानदार पैकिंग रिकॉर्ड, उत्पाद पहचान, डिलीवरी प्रमाण और लौटे सामान की जांच दर्ज करें। शिकायत में व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक करने के बजाय प्लेटफॉर्म को जरूरी प्रमाण दें।
प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है कि विक्रेताओं की जांच, स्पष्ट रिटर्न नियम और निष्पक्ष विवाद समाधान उपलब्ध कराए। सुरक्षा के नाम पर सही शिकायत या रिफंड रोकना समाधान नहीं है।
वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर तुरंत बैंक या भुगतान सेवा को सूचित करें और 1930 पर शिकायत करें। उपभोक्ता सहायता के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 से संपर्क किया जा सकता है। जल्दी शिकायत करना जरूरी है, लेकिन रकम वापसी की गारंटी नहीं होती।



