बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार अधिनियम यानी RTE के तहत निजी स्कूलों में आरक्षित सीटों और दाखिले से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य शासन पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत के सामने पेश किए गए आंकड़ों में कई निजी स्कूलों में RTE की सीटें शून्य या बेहद कम बताए जाने पर सवाल उठे हैं। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए शासन को अब सही, पूर्ण और सत्यापित रिकॉर्ड पेश करने का अंतिम अवसर दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से शासन द्वारा पेश किए गए रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए। दलील दी गई कि कई बड़े निजी स्कूलों में RTE के तहत आरक्षित सीटों की संख्या वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती। इन विसंगतियों को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया।

अदालत ने साफ कहा कि न्यायालय के समक्ष रिकॉर्ड पूरी तरह सही और विश्वसनीय होना चाहिए। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शासन द्वारा पेश किए गए आंकड़ों पर नाराजगी जताते हुए टिप्पणी की कि न्यायालय के साथ इस तरह का मजाक नहीं किया जा सकता। साथ ही वर्ष 2016 में दिए गए निर्देशों के अनुपालन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया।

अब हाईकोर्ट ने राज्य शासन को सभी निजी स्कूलों का RTE से संबंधित सही और सत्यापित डेटा जुटाकर अगली सुनवाई में पेश करने का निर्देश दिया है। इसके लिए 18 नवंबर तक का समय दिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यह शासन को रिकॉर्ड पेश करने का अंतिम अवसर है।

सबसे बड़ी बात यह है कि यदि निर्धारित समयसीमा तक सभी स्कूलों का सही रिकॉर्ड अदालत के सामने पेश नहीं किया गया, तो शिक्षा सचिव कमलप्रीत सिंह के खिलाफ धारा 311 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। हाईकोर्ट की इस चेतावनी के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप की स्थिति है।

RTE पोर्टल पर स्कूल और सीट की जानकारी, मैपिंग रिपोर्ट तथा जिला एवं कक्षा वार बच्चों की संख्या से संबंधित रिपोर्ट उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर हैं कि शासन अगली सुनवाई में कितना सटीक और सत्यापित रिकॉर्ड अदालत के सामने रखता है।

RTE के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार दिलाने की व्यवस्था है। ऐसे में सीटों और दाखिले के आंकड़ों में गड़बड़ी का सवाल केवल सरकारी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर उन बच्चों पर पड़ सकता है जिनके लिए यह व्यवस्था बनाई गई है।

अब असली परीक्षा शिक्षा विभाग की है—18 नवंबर को हाईकोर्ट के सामने कौन-सा रिकॉर्ड पेश होता है और उसमें उठे सवालों का शासन क्या जवाब देता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।