CBSE ने यह बदलाव निर्धारित शैक्षणिक समय-सारणी के अनुरूप किया है। बोर्ड के इस निर्णय से उन विद्यार्थियों को राहत मिलेगी, जिन्हें नए पाठ्यक्रम के तहत अतिरिक्त विषयों की पढ़ाई करनी पड़ रही थी। हालांकि, वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 10वीं में पढ़ रहे विद्यार्थियों पर इन बदलावों का कोई असर नहीं होगा। उनके लिए पहले से लागू विषय योजना ही जारी रहेगी।
10वीं की बोर्ड परीक्षा में पांच विषय होंगे अनिवार्य
बोर्ड की नई व्यवस्था के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2027-28 में कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा के लिए पांच मुख्य विषय अनिवार्य होंगे। इनमें पहली भाषा (R1), दूसरी भाषा (R2), गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान शामिल हैं। विद्यार्थियों को इन पांचों विषयों की बोर्ड परीक्षा देनी होगी।
इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को वैकल्पिक विषय चुनने का अवसर भी मिलेगा। बोर्ड ने विषय चयन में लचीलापन देते हुए उन्नत गणित, उन्नत विज्ञान और व्यावसायिक शिक्षा के विकल्प उपलब्ध कराए हैं।
22 कौशल विषयों में से चुन सकेंगे विकल्प
CBSE ने व्यावसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा को भी अनिवार्य curricular area के रूप में जारी रखा है। इसके तहत विद्यार्थी कौशल विकास (Kaushal Vikas) या बोर्ड द्वारा अधिसूचित 22 कौशल विषयों में से किसी एक का चयन कर सकेंगे।
इन विषयों में सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डाटा साइंस, हेल्थकेयर, कृषि, बैंकिंग एवं बीमा, पर्यटन, खुदरा कारोबार, सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हार्डवेयर तथा डिजाइन थिंकिंग एवं नवाचार जैसे विकल्प शामिल हैं।
कौशल विकास विषय चुनने वाले विद्यार्थियों का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा। वहीं, 22 अधिसूचित कौशल विषयों में से किसी एक का चयन करने वाले विद्यार्थियों को कक्षा 10वीं में संबंधित विषय की बोर्ड परीक्षा देनी होगी। सफल विद्यार्थियों के अंक और ग्रेड अंकसूची में दर्ज किए जाएंगे।
एक विषय में फेल होने पर दूसरे विषय से मिल सकती है राहत
बोर्ड ने परीक्षा परिणाम में विषय प्रतिस्थापन (Subject Replacement) का प्रावधान भी स्पष्ट किया है। इसके तहत यदि कोई विद्यार्थी गणित, विज्ञान या सामाजिक विज्ञान में से किसी एक विषय में निर्धारित 33 प्रतिशत अंक प्राप्त नहीं कर पाता है, लेकिन चयनित कौशल विषय में उत्तीर्ण हो जाता है, तो निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत कौशल विषय से संबंधित अनुत्तीर्ण विषय को प्रतिस्थापित किया जा सकता है।
इसी तरह पहली या दूसरी भाषा में असफल होने की स्थिति में निर्धारित शर्तों के तहत वैकल्पिक भाषा के माध्यम से भी राहत मिल सकती है।
वर्तमान 10वीं के विद्यार्थियों को नहीं होगा नुकसान
CBSE ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था का लाभ और बदलाव संबंधित शैक्षणिक सत्र के विद्यार्थियों पर ही लागू होंगे। वर्तमान में कक्षा 10वीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए पुरानी विषय योजना जारी रहेगी।
बोर्ड के इस फैसले को माध्यमिक स्तर पर पाठ्यक्रम को व्यवस्थित करने और विद्यार्थियों पर अनावश्यक शैक्षणिक एवं परीक्षा संबंधी दबाव कम करने की दिशा में अहम बदलाव माना जा रहा है।

