बिलासपुर। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कर्मचारी की पदोन्नति को लेकर विवाद गहरा गया है। आदिम जाति विकास विभाग में नियुक्त एक कर्मचारी को स्कूल शिक्षा विभाग में पदोन्नति देने से जुड़े मामले में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी के पत्र को नए DEO ने निरस्त कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद विभागीय निर्णय प्रक्रिया और कर्मचारी की पदोन्नति की पात्रता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
दो पत्रों के अलग-अलग रुख से बढ़ा विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित कर्मचारी शशांक द्विवेदी की नियुक्ति वर्ष 2005 में आदिम जाति विकास विभाग के माध्यम से हुई थी। तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने 29 मई 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को भेजे पत्र में कर्मचारी की मूल नियुक्ति और विभागीय स्थिति का उल्लेख करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग में सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति को संभव नहीं बताया था।
हालांकि, इसके बाद 11 जून 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को भेजे गए एक अन्य पत्र में पदोन्नति संबंधी दावे का समर्थन किए जाने की बात सामने आई। दोनों पत्रों में सामने आए अलग-अलग रुख ने पूरे मामले को चर्चा में ला दिया।
हाईकोर्ट की कार्यवाही और विधिक राय का भी उल्लेख
मामले में न्यायालयीन कार्यवाही और शासन स्तर पर हुए पत्राचार का भी उल्लेख किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच से संबंधित कार्यवाही के बाद अतिरिक्त महाधिवक्ता ने 1 जुलाई 2025 को विधिक राय देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने की सलाह दी थी।
इसके बाद 7 जुलाई 2025 को स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्रालय ने DEO कार्यालय को इस संबंध में प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे। इस प्रक्रिया में आगे क्या कार्रवाई हुई, इसे लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
नए DEO ने समीक्षा के बाद निरस्त किया पुराना पत्र
तत्कालीन DEO विजय टांडे के स्थानांतरण के बाद जिला शिक्षा अधिकारी अजय कौशिक ने मामले की समीक्षा की। इसके बाद 27 जुलाई 2026 को जारी पत्र क्रमांक 9226 के माध्यम से 11 जून 2026 को जारी पूर्व पत्र को निरस्त कर दिया गया।
बताया गया है कि समीक्षा के दौरान कर्मचारी की मूल नियुक्ति आदिम जाति विकास विभाग में होने और स्कूल शिक्षा विभाग के संवर्ग में उनकी पदोन्नति की पात्रता से जुड़े पहलुओं पर विचार किया गया।
जांच और जवाबदेही को लेकर उठे सवाल
इस प्रकरण ने जिला शिक्षा विभाग में पदोन्नति से जुड़े निर्णयों की प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मामले में तत्कालीन अधिकारी की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी भी अधिकारी की जिम्मेदारी या अनियमितता पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों और विभागीय जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
अब इस मामले में विभागीय स्तर पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और पदोन्नति की पात्रता को लेकर स्थिति किस तरह स्पष्ट होती है, इस पर नजर रहेगी।


