सीपत। तहसील में अधिकारियों की संख्या बढ़ने से आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद रहती है, लेकिन जब जरूरी कर्मचारी ही उपलब्ध न हों, तो व्यवस्था कितनी प्रभावी होगी? बिलासपुर जिले की सीपत तहसील में अधिकारियों की नई पदस्थापना के बीच यही सवाल खड़ा हो रहा है। यहां पहली बार तहसीलदार, अतिरिक्त तहसीलदार और नायब तहसीलदार के रूप में तीन राजस्व अधिकारियों की व्यवस्था बनने जा रही है, लेकिन दूसरी ओर राजस्व निरीक्षक (आरआई) और कार्यालयीन कर्मचारियों के कई पद खाली होने की समस्या सामने आई है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल अधिकारियों की संख्या बढ़ने से किसानों और ग्रामीणों के राजस्व संबंधी काम समय पर पूरे हो पाएंगे?
छह साल बाद तीन राजस्व अधिकारियों की व्यवस्था
सीपत उप तहसील को 6 नवंबर 2020 को पूर्ण तहसील का दर्जा मिला था। अब यहां तहसीलदार संदीप साय और अतिरिक्त तहसीलदार प्रकृति ध्रुव की पदस्थापना की गई है। वहीं, नायब तहसीलदार पूनम कनौजे पहले से यहां जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
यह पहली बार है जब सीपत तहसील में तीनों स्तर के राजस्व अधिकारियों की पदस्थापना हो रही है। इससे राजस्व प्रकरणों की सुनवाई और प्रशासनिक कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब अधिकारियों के साथ जरूरी अधीनस्थ कर्मचारी भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हों।
55 गांवों का भार, लेकिन कर्मचारियों की कमी
सीपत तहसील का कार्यक्षेत्र लगभग 55 गांवों तक फैला है। यहां राजस्व संबंधी कामकाज के लिए 21 पटवारी हल्के और तीन राजस्व निरीक्षक मंडल हैं। नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, भूमि अभिलेखों में सुधार और राजस्व प्रकरणों के निराकरण जैसे कामों के लिए मैदानी अमले की अहम भूमिका होती है।
ऐसे बड़े क्षेत्र में कर्मचारियों की कमी का असर ग्रामीणों के कामकाज पर पड़ सकता है। लोगों को अपने जमीन संबंधी मामलों के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए पर्याप्त स्टाफ और समयबद्ध कार्यप्रणाली जरूरी है।
सात महीने से खाली है खम्हरिया आरआई मंडल का पद
रिपोर्ट के अनुसार, सीपत में संध्या नामदेव राजस्व निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि खम्हरिया राजस्व निरीक्षक मंडल का पद पिछले सात महीनों से रिक्त है। फिलहाल धनिया के पटवारी को इसकी जिम्मेदारी देकर काम चलाया जा रहा है।
सीपत और खम्हरिया राजस्व निरीक्षक मंडलों में नौ-नौ पटवारी हल्के हैं, जबकि जयरामनगर क्षेत्र में दो पटवारी हल्के हैं। ऐसे में अतिरिक्त जिम्मेदारियों के बीच राजस्व संबंधी कामकाज का संचालन एक चुनौती बना हुआ है।
बाबुओं की कमी से भी बढ़ सकती है परेशानी
तहसील कार्यालय में केवल मैदानी कर्मचारियों की ही नहीं, बल्कि लिपिकीय और अन्य कार्यालयीन अमले की कमी भी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ कर्मचारी दूसरे तहसील कार्यालयों में पदस्थ हैं और सीपत में सीमित कर्मचारियों के भरोसे कई जिम्मेदारियां संचालित हो रही हैं।
कार्यालय में फाइलों का रखरखाव, अभिलेखों का संधारण, प्रकरणों की प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक काम सुचारु रूप से चलाने के लिए नियमित कर्मचारियों की जरूरत होती है। जब उपलब्ध कर्मचारियों को कई तरह की जिम्मेदारियां निभानी पड़ें, तो कामकाज पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।
नया तहसील भवन तैयार, लेकिन व्यवस्था का इंतजार
सीपत का नया तहसील भवन उद्घाटन के लिए तैयार बताया गया है। नए भवन से ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है, लेकिन सवाल यह भी है कि क्या भवन और अधिकारियों की बढ़ी संख्या के साथ कर्मचारियों की कमी दूर करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे?
सीपत क्षेत्र में एनटीपीसी से जुड़े भू-विस्थापितों के मामलों सहित अनेक महत्वपूर्ण भूमि संबंधी प्रकरण सामने आते हैं। ऐसे में राजस्व कार्यालय की कार्यक्षमता का सीधा संबंध लोगों के जरूरी कामों और उनके समय से है।
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
अब प्रशासन के सामने एक ओर तीन राजस्व अधिकारियों के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा करने और दूसरी ओर रिक्त पदों को भरने की चुनौती है। अधिकारियों की नई पदस्थापना से कामकाज में सुधार की उम्मीद जरूर है, लेकिन पर्याप्त राजस्व निरीक्षक, लिपिक और अन्य कर्मचारियों के बिना व्यवस्था को गति देना आसान नहीं होगा।
क्षेत्रवासियों की अपेक्षा है कि सीपत तहसील में अधिकारियों की तैनाती के साथ कर्मचारियों की कमी दूर करने पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि किसानों और ग्रामीणों को अपने राजस्व संबंधी कामों के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन रिक्त पदों को भरने और राजस्व सेवाओं को समयबद्ध बनाने के लिए क्या कदम उ

