बिलासपुर/मस्तूरी। मस्तूरी विकासखंड की ग्राम पंचायत केवटाडीह (भूतहा) से सामने आए एक वायरल वीडियो ने पंचायत की कार्यप्रणाली और निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में निर्वाचित महिला सरपंच जयंती जगत की मौजूदगी में उनके पति अरुण जगत शपथ लेते हुए दिखाई दे रहे हैं।

वीडियो सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब सरपंच का चुनाव जयंती जगत ने जीता है, तो फिर शपथ उनके पति ने किस हैसियत से ली?

पत्नी निर्वाचित सरपंच, लेकिन पति ने ली शपथ

वायरल वीडियो में मंच पर निर्वाचित सरपंच जयंती जगत मौजूद दिखाई देती हैं, जबकि उनके पति अरुण जगत शपथ पत्र पढ़ते नजर आ रहे हैं। शपथ के दौरान पंचायत के दायित्व को निष्ठा और ईमानदारी से निभाने की बात कही जा रही है।

यही दृश्य अब चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीण स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधि की जगह किसी अन्य व्यक्ति द्वारा शपथ लेने की अनुमति आखिर किस आधार पर दी गई?

अधिकारी और ग्रामीण भी रहे उपस्थित

मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि शपथ ग्रहण कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों के साथ जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल यह भी है कि अगर वीडियो में दिखाई दे रही स्थिति वास्तविक है, तो मौके पर मौजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं की?

क्या शपथ ग्रहण की प्रक्रिया में कोई चूक हुई?

क्या यह सिर्फ औपचारिकता थी या इसके पीछे कोई और प्रक्रिया अपनाई गई?

और सबसे अहम—क्या निर्वाचित सरपंच के स्थान पर उनके पति द्वारा शपथ लेना नियमों के अनुरूप है?

इन सवालों के जवाब अब प्रशासनिक जांच के बाद ही साफ हो सकेंगे।

बिजली विभाग में कर्मचारी होने की भी चर्चा

मामले में एक और तथ्य चर्चा में है। वायरल खबर के मुताबिक अरुण जगत के बिजली विभाग में नियमित कर्मचारी होने की बात कही जा रही है। यदि यह तथ्य सही है, तो उनकी सरकारी सेवा और पंचायत के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में निभाई गई भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की जरूरत है।

हालांकि, इस संबंध में भी आधिकारिक स्तर पर पुष्टि सामने नहीं आई है।

वायरल VIDEO ने बढ़ाई हलचल

शपथ ग्रहण का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया है। वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम ने न केवल पंचायत की प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि महिला आरक्षण और निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की वास्तविक भूमिका को लेकर भी बहस छेड़ दी है।

फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर कई सवाल उठ रहे हैं, लेकिन घटना की आधिकारिक पुष्टि और नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।

अब देखने वाली बात होगी कि क्या जिला प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर शपथ ग्रहण की पूरी प्रक्रिया की जांच करता है और यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारी तय की जाती है या नहीं।