रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं और साफ-सफाई को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कालीबाड़ी स्थित जिला मातृ-शिशु अस्पताल में चूहों की खुलेआम आवाजाही का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। अस्पताल के वार्डों और पेयजल मशीन के आसपास चूहे घूमते दिखाई दे रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसी अस्पताल में गर्भवती महिलाओं, प्रसूताओं और नवजात शिशुओं का इलाज किया जाता है।
वार्डों में चार से पांच चूहे घूमते दिखे
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो में एक-दो नहीं बल्कि चार से पांच चूहे अस्पताल परिसर में घूमते नजर आ रहे हैं। चूहे वार्ड के भीतर और खिड़की के आसपास दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, पेयजल मशीन के आसपास भी उनकी मौजूदगी सामने आई है। अस्पताल में मरीजों के परिजन भी अपने सामान के साथ वहीं आराम करते दिखाई दे रहे हैं।
नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर मंडराता संक्रमण का खतरा
अस्पताल में नवजात बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती। ऐसे में चूहों की मौजूदगी संक्रमण के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है। चूहे अपने मल-मूत्र और लार के जरिए भोजन, पानी तथा आसपास की सतहों को दूषित कर सकते हैं। इससे मरीजों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य पर खतरा पैदा हो सकता है।
विशेष रूप से नवजात शिशुओं के बिस्तर, कपड़े, दूध की बोतल और अन्य जरूरी सामान तक चूहों की पहुंच किसी बड़ी स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकती है।
चूहे पकड़ने के लिए एजेंसी को दिया गया है ठेका
हैरानी की बात यह है कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से पिछले महीने ही चूहों को पकड़ने के लिए एक एजेंसी को ठेका दिया गया है। अस्पताल में एजेंसी का संपर्क नंबर भी लगाया गया है। बताया गया है कि चूहे दिखाई देने पर संबंधित नंबर पर सूचना देने से एजेंसी के कर्मचारी मौके पर पहुंचकर उन्हें पकड़ते हैं।
इसके बावजूद अस्पताल में चूहों की मौजूदगी सामने आना पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।
अस्पताल प्रबंधन की क्या है सफाई?
इस मामले में कालीबाड़ी जिला अस्पताल की प्रभारी डॉ. शशि प्रभा बंजारे के अनुसार, चूहे पकड़ने के लिए एजेंसी को ठेका दिया गया है और अस्पताल में संपर्क नंबर भी लगाया गया है। चूहे दिखाई देने पर उस नंबर पर सूचना देकर एजेंसी की मदद ली जा सकती है।
अब जवाबदेही तय करने की जरूरत
सरकारी अस्पतालों में मरीज बेहतर इलाज और सुरक्षित वातावरण की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में मातृ-शिशु अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर चूहों का खुलेआम घूमना सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अब सवाल यह है कि जब चूहे पकड़ने के लिए एजेंसी को ठेका दिया गया है, तो अस्पताल के वार्डों में उनकी मौजूदगी क्यों बनी हुई है? क्या नियमित निगरानी और प्रभावी पेस्ट कंट्रोल किया जा रहा है? क्या अस्पताल प्रबंधन नवजात शिशुओं और प्रसूताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाएगा?

