बिलासपुर। जिले के सीपत-कुली-खम्हरिया मार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब तेज होता जा रहा है। लंबे समय से जर्जर सड़क, उड़ती धूल और भारी वाहनों की आवाजाही से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी नाराजगी जताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को सड़क की स्थिति में सुधार के लिए 72 घंटे की मोहलत दी है।

जानकारी के मुताबिक, सड़क निर्माण के लिए करीब 19.84 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत होने के बावजूद अब तक काम शुरू नहीं होने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। जनदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने सड़क की समस्या को प्रशासन के सामने रखा, जिसके बाद डिप्टी कलेक्टर शिव बनर्जी ने संबंधित PWD अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण धूल और गड्ढों से राहगीरों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भारी वाहनों की आवाजाही से दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण के साथ तत्काल राहत के तौर पर नियमित पानी के छिड़काव की मांग की है।

हादसे के बाद बढ़ा आक्रोश

बताया गया कि 6 सितंबर 2026 को इसी मार्ग पर हुए सड़क हादसे में करीब 35 वर्षीय एक महिला की मौत हो गई थी। घटना के बाद ग्रामीणों ने सड़क की बदहाली को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। ग्रामीणों का आरोप है कि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता का आश्वासन दिए जाने के बावजूद अब तक मुआवजा नहीं मिल पाया है।

10 हजार लोगों के जुटने का दावा

आंदोलन की तैयारी कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि यदि 72 घंटे के भीतर सड़क निर्माण और आवश्यक राहत कार्य शुरू नहीं हुए तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। आंदोलन की अगुवाई कर रहे अर्जुन वस्त्रकार के अनुसार गांव-गांव बैठकें की जा रही हैं और जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न संगठनों को आंदोलन से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने करीब 10 हजार लोगों के सड़क पर उतरने का दावा किया है।

ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने सड़क निर्माण जल्द शुरू करने, धूल रोकने के लिए नियमित पानी का छिड़काव, हादसे में मृत महिला के परिवार को सहायता, स्कूली समय में भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक और कुली से खम्हरिया-सीपत तक स्ट्रीट लाइट लगाने जैसी मांगें रखी हैं।

अब निगाहें प्रशासन और PWD की कार्रवाई पर हैं। 72 घंटे की समय-सीमा में सड़क पर काम शुरू होता है या ग्रामीण आंदोलन का रास्ता अपनाते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।