बिलासपुर | छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्कूल शिक्षा विभाग में चर्चित युक्तियुक्तकरण और पदोन्नति घोटाले का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। निलंबित जूनियर ऑडिटर सुनील कुमार यादव को निलंबन के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। सुनवाई के दौरान अदालत ने उन्हें पहले संबंधित विभागीय प्राधिकारी के समक्ष अपील करने की सलाह दी, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली।

जस्टिस बी.डी. गुरु की एकल पीठ में मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने स्पष्ट किया कि सेवा नियमों के तहत उपलब्ध विभागीय अपील का रास्ता अपनाया जाना चाहिए। इसके बाद याचिकाकर्ता ने उचित फोरम में जाने की छूट मांगते हुए याचिका वापस ले ली। अदालत ने इसकी अनुमति देते हुए याचिका को वापस ली गई याचिका के रूप में खारिज कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

बिलासपुर जिले में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण और पदोन्नति प्रक्रिया में कथित वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं की जांच की गई थी। जांच दल ने अपनी रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को सौंपी थी, जिसे आगे लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) भेजा गया। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी संदीप पाण्डेय ने न्यायालयीन शाखा में पदस्थ लिपिक सुनील यादव को निलंबित कर दिया था।

जांच से जुड़े आरोपों में निरस्त युक्तियुक्तकरण आदेशों में कथित हेरफेर, पदस्थापना आदेशों में संशोधन और नियमों के विपरीत कुछ कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने जैसे गंभीर बिंदु शामिल बताए गए हैं।

अब बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई का सवाल

निलंबित लिपिक की याचिका वापस लिए जाने के बाद इस मामले में विभागीय कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं। अब अहम सवाल यह है कि जांच में सामने आई कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय करते हुए क्या अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी?