बिलासपुर। शहर के ट्रैफिक थाने में उस वक्त हंगामा मच गया, जब अपने भाई की जब्त बाइक छुड़ाने पहुंचीं दो बहनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जमकर विरोध किया। दोनों महिलाएं एक छोटे बच्चे के साथ थाने पहुंचीं और पुलिस से बार-बार बाइक छोड़ने की मांग करती रहीं। मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया, जब महिलाओं और पुलिसकर्मियों के बीच बहस की स्थिति बन गई।
भाई का दावा—“फल्ली खा रहा था, पुलिस ने उठा ली गाड़ी”
पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा युवक के उस दावे की हो रही है, जिसमें उसने कहा कि वह ठेले के पास खड़ा होकर फल्ली खा रहा था, तभी पुलिस ने उसकी बाइक उठा ली। युवक ने पुलिस पर कार्रवाई के साथ पैसे मांगने का भी आरोप लगाया। हालांकि, ट्रैफिक पुलिस ने युवक के इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है।
बहनों ने थाने पहुंचकर मचाया हंगामा
भाई की बाइक जब्त होने के बाद दोनों बहनें ट्रैफिक थाने पहुंचीं। महिलाओं ने पुलिस से गाड़ी छोड़ने की गुहार लगाई और कहा कि बाइक घर के काम आती है। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि थाने में काफी देर तक हंगामे और बहस की स्थिति बनी रही।
पुलिस का दावा—नशे में चला रहा था बाइक
दूसरी तरफ ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि युवक को शराब के नशे में बाइक चलाते हुए पकड़ा गया था। पुलिस के मुताबिक ब्रेथ एनालाइजर से जांच के दौरान उसकी रीडिंग करीब 130 के आसपास आई थी। इसके बाद मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत कार्रवाई करते हुए बाइक जब्त की गई।
महिला पुलिस बल बुलाना पड़ा
मामला बढ़ता देख ट्रैफिक पुलिस ने सिविल लाइन थाने से महिला पुलिस बल बुलाया। महिला पुलिसकर्मियों ने दोनों महिलाओं को समझाया कि धारा 185 के तहत जब्त वाहन को सीधे ट्रैफिक थाने से नहीं छोड़ा जा सकता। इसके लिए न्यायालय की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। समझाइश के बाद दोनों महिलाएं वहां से चली गईं।
अब सवाल—आखिर सच क्या है?
एक तरफ युवक और उसकी बहनों का आरोप है कि पुलिस ने गलत तरीके से बाइक जब्त की, वहीं पुलिस का दावा है कि युवक शराब के नशे में बाइक चला रहा था और जांच में इसकी पुष्टि हुई। ऐसे में “फल्ली खाने के दौरान बाइक जब्त हुई या नशे में ड्राइविंग पर कार्रवाई हुई?” यही सवाल इस पूरे मामले को चर्चा में ला रहा है।
फिलहाल पुलिस ने कार्रवाई को नियमानुसार बताया है और जब्त वाहन को न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही छोड़े जाने की बात कही है।

