बिलासपुर। नवरात्र का पावन पर्व चल रहा है। शहर के मंदिरों में माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। सुबह से लेकर देर रात तक धार्मिक स्थलों और उनसे जुड़े मार्गों पर लोगों की आवाजाही बनी हुई है। महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और परिवार के साथ माता के दर्शन करने निकल रहे हैं। ऐसे समय में शहर की सड़कें और रास्ते रोशनी से जगमग होने चाहिए, ताकि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के सुरक्षित आवागमन कर सकें। लेकिन बदहाल स्ट्रीट लाइटों को लेकर सामने आ रही समस्या ने नगर निगम की व्यवस्थाओं और तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
त्योहार के इस महत्वपूर्ण अवसर पर जब शहर में साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, तब स्ट्रीट लाइटों की समस्या लोगों की परेशानी बढ़ा रही है। सवाल यह है कि क्या नगर निगम ने नवरात्र से पहले शहर की प्रकाश व्यवस्था का निरीक्षण किया था? क्या खराब लाइटों की पहचान कर उन्हें समय रहते ठीक कराया गया? यदि तैयारियां की गई थीं, तो फिर रोशनी की व्यवस्था को लेकर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
शहरवासियों के लिए यह केवल सुविधा का मामला नहीं है। रात के समय सड़कों पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है। अंधेरे में सड़क की स्थिति, गड्ढे, किनारे खड़े वाहन और रास्ते में आने वाली बाधाएं स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं। ऐसे में बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। नवरात्र के दौरान लोगों की आवाजाही बढ़ने के कारण यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है।
नगर निगम के दावे बनाम जमीनी हकीकत
शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावे अक्सर किए जाते हैं, लेकिन किसी भी व्यवस्था की असली परीक्षा तब होती है, जब उसका लाभ आम नागरिकों को जमीन पर दिखाई दे। स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधा का उद्देश्य ही यही है कि रात में भी सड़कें सुरक्षित रहें और लोगों को आने-जाने में परेशानी न हो।
यदि शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्ट्रीट लाइटें बंद हैं या पर्याप्त रोशनी नहीं मिल रही है, तो यह नियमित निगरानी और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। नगर निगम की जिम्मेदारी केवल लाइटें लगवाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका समय-समय पर निरीक्षण कराना, खराब होने पर तत्काल मरम्मत करवाना और शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
नवरात्र जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान इस जिम्मेदारी का महत्व और बढ़ जाता है। आखिर त्योहारों की तैयारियों का आकलन केवल सजावट और प्रचार से नहीं, बल्कि इस बात से भी होना चाहिए कि आम नागरिकों को कितनी सुविधाएं मिल रही हैं।
रात में दर्शन के लिए निकलने वाले श्रद्धालुओं की परेशानी कौन समझेगा?
नवरात्र में कई श्रद्धालु शाम की आरती और रात्रिकालीन पूजा में शामिल होने के लिए घरों से निकलते हैं। मंदिरों के आसपास और उनसे जुड़ी सड़कों पर आवाजाही देर रात तक जारी रह सकती है। ऐसे में रास्तों पर पर्याप्त रोशनी होना बेहद आवश्यक है।
अंधेरे रास्तों से गुजरने वाले लोगों को हर कदम पर सतर्क रहना पड़ता है। वाहन चालकों के लिए भी कम रोशनी परेशानी का कारण बन सकती है। पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं को सड़क के किनारे सुरक्षित जगह देखकर चलना पड़ता है। यदि कहीं सड़क पर गड्ढे या अन्य बाधाएं हों, तो अंधेरे में उनका अंदाजा लगाना मुश्किल हो सकता है।
ऐसे हालात में नगर निगम को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि धार्मिक स्थलों तक जाने वाले प्रमुख मार्गों, सार्वजनिक स्थानों और अधिक आवाजाही वाले इलाकों में स्ट्रीट लाइटें चालू हालत में रहें। जिन स्थानों पर प्रकाश व्यवस्था खराब है, वहां प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कराई जानी चाहिए।
शिकायतों के बाद जागेगा निगम या पहले ही होगी कार्रवाई?
शहर की बुनियादी सुविधाओं के संचालन में सबसे बड़ी चुनौती केवल समस्याओं का समाधान करना नहीं, बल्कि समस्या उत्पन्न होने से पहले उसकी पहचान करना भी है। यदि किसी इलाके की स्ट्रीट लाइट खराब हो जाती है, तो उसकी जानकारी संबंधित विभाग तक पहुंचने और मरम्मत होने के बीच अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
नगर निगम को यह बताना चाहिए कि शहर में स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव की जिम्मेदारी किस विभाग या एजेंसी के पास है। खराब लाइटों की शिकायत दर्ज कराने के लिए नागरिकों को कौन-सा माध्यम उपलब्ध है? शिकायत मिलने के बाद कितने समय में मरम्मत की जाती है? क्या नवरात्र के दौरान प्रकाश व्यवस्था की निगरानी के लिए कोई विशेष व्यवस्था बनाई गई है?
इन सवालों के जवाब इसलिए जरूरी हैं, क्योंकि नागरिकों को हर बार समस्या सामने आने के बाद शिकायत करने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। बेहतर प्रशासन वही है, जो आम लोगों की परेशानी को पहले समझे और समय रहते समाधान करे।
निगम का दावा—खराब स्ट्रीट लाइटें बदली जाएंगी, त्योहार में अंधेरा नहीं रहने देंगे
स्ट्रीट लाइटों की समस्या को लेकर नगर निगम के प्रभारी विद्युत व प्रकाश व्यवस्था विजय ताम्रकार ने कहा कि शहर में लगी कई लाइटें पुरानी हो चुकी हैं। इनके बंद होने पर उन्हें तत्काल बदलने की प्रक्रिया की जा रही है। उन्होंने बताया कि यदि चयनित सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें बंद हैं, तो उनकी मरम्मत कराकर प्रकाश व्यवस्था सामान्य की जाएगी।
विजय ताम्रकार के मुताबिक, त्योहार के दौरान सड़कों पर अंधेरा नहीं रहने दिया जाएगा और खराब लाइटों को दुरुस्त करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि, अब देखने वाली बात यह होगी कि निगम का यह आश्वासन जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी अमल में आता है। नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए जरूरी है कि बंद स्ट्रीट लाइटों की पहचान कर समय पर मरम्मत की जाए, ताकि लोगों को अंधेरे रास्तों से गुजरने की परेशानी न हो।
अब निगम के दावों की असली परीक्षा कार्रवाई से होगी। शहरवासियों को उम्मीद है कि त्योहार के दौरान प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए किए जा रहे प्रयास जल्द जमीन पर दिखाई देंगे।

