रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना में अपात्र हितग्राहियों को लाभ मिलने का मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर जांच और वसूली की कार्रवाई तेज हो गई है। रायपुर जिले में जांच के दौरान 351 हितग्राही अपात्र पाए गए हैं। इनमें से 189 लोगों से अब तक 6.72 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है, जबकि शेष 162 हितग्राहियों से राशि वापस लेने की प्रक्रिया जारी है। वहीं, बिलासपुर जिले में भी 200 से अधिक संदिग्ध अपात्र मामलों की जानकारी सामने आई है।

सरकारी कर्मचारियों के परिवार भी सूची में

खबर के मुताबिक, रायपुर जिले में शुरुआती जांच के दौरान दो हजार से अधिक हितग्राहियों की पात्रता पर संदेह जताया गया था। सत्यापन के बाद 351 हितग्राहियों को अपात्र पाया गया। जांच में सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों से जुड़े मामले भी सामने आए हैं।

प्रारंभिक जांच में 128 शासकीय सेवकों और उनके परिजनों से संबंधित मामले चिह्नित किए गए। इनमें 42 महिला सरकारी कर्मचारी, 78 सरकारी कर्मचारियों की पत्नियां, छह बेटियां और दो पेंशनधारी महिलाएं शामिल बताई गई हैं।

आयकरदाता और अन्य अपात्र हितग्राही भी शामिल

विभागीय जानकारी के अनुसार, जांच में 29 आयकरदाता, 21 वर्ष से कम उम्र की पांच महिलाएं, 11 अविवाहित महिलाएं, सात पुरुष हितग्राही और राज्य के बाहर रहने वाली चार महिलाएं भी सामने आई हैं। इन मामलों में योजना की पात्रता शर्तों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी शैल ठाकुर के अनुसार, अपात्र हितग्राहियों से राशि वापस लेने की प्रक्रिया जारी है।

बिलासपुर में भी सामने आए 200 से अधिक मामले

बिलासपुर जिले में भी महतारी वंदन योजना के तहत 200 से अधिक अपात्र मामलों की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। बिल्हा विकासखंड में जांच के दौरान 11 ऐसे हितग्राहियों की पहचान हुई थी, जिनके स्वयं या पति के शासकीय सेवा में होने के बावजूद योजना की राशि मिल रही थी। संबंधित मामलों में राशि की वसूली के लिए नोटिस जारी करने की कार्रवाई शुरू की गई है।

हर महीने मिलते हैं एक हजार रुपये

महतारी वंदन योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान करना है। हालांकि, पात्रता शर्तों के विपरीत लाभ मिलने के मामले सामने आने के बाद लाभार्थियों के सत्यापन और सरकारी राशि की वसूली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अब विभागीय जांच के आधार पर अपात्र पाए गए हितग्राहियों से नियमानुसार राशि वापस लेने की कार्रवाई की जा रही है।