बिलासपुर। शहर में विकास कार्यों और निर्माण की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के कुदुदंड में महज दो महीने पहले बनाई गई सीमेंट कांक्रीट (सीसी) सड़क की ऊपरी परत उखड़ने के बाद अब उसे दोबारा बनाया जा रहा है। नई सड़क का इतनी जल्दी खराब होना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

मामला कुदुदंड के मिलन चौक से चांदनी चौक तक जाने वाली लगभग 200 मीटर लंबी सीसी सड़क का है। जानकारी के मुताबिक, सितंबर 2026 में इस सड़क का निर्माण ठेका फर्म एसी एसोसिएट्स द्वारा कराया गया था। लेकिन निर्माण के महज दो महीने के भीतर ही सड़क की ऊपरी परत खराब हो गई और अब ठेका कंपनी को दोबारा मरम्मत और ढलाई का काम करना पड़ रहा है।

गीली सड़क पर वाहन चलने से खराब हुई परत

बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण के दौरान सीमेंट कांक्रीट पूरी तरह से सूखने और मजबूत होने से पहले ही कुछ लोगों ने उस पर वाहन चला दिए थे। इसके चलते सड़क की पहली परत उबड़-खाबड़ और कमजोर हो गई। हालांकि, सवाल यह भी है कि जब सड़क की ढलाई की जा रही थी, तब निर्माण स्थल पर सुरक्षा और निगरानी की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

निगम ने ठेकेदार को अपने खर्च पर दोबारा निर्माण के दिए निर्देश

सड़क की खराब स्थिति सामने आने के बाद नगर निगम ने संबंधित ठेका फर्म को अपने खर्च पर सुधारात्मक कार्य करने के निर्देश दिए हैं। निगम का कहना है कि सड़क की मजबूती सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ठेका कंपनी की थी। यदि निर्माण के दौरान गीली सड़क पर वाहन चलाए गए, तो उन्हें रोकने की जिम्मेदारी भी ठेका कंपनी की थी।

नगर निगम के जोन क्रमांक-3 के जोन कमिश्नर प्रवेश कश्यप के अनुसार, फिलहाल सड़क की पहली परत को दोबारा तैयार करने का काम चल रहा है। जल्द ही निर्माण कार्य पूरा कर सड़क को मजबूत बनाया जाएगा।

विकास कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी कौन करेगा?

इस पूरे मामले ने नगर निगम की निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जिस सड़क को बनाने में सरकारी धन खर्च किया गया, उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या निर्माण के दौरान संबंधित इंजीनियरों ने नियमित निरीक्षण किया था? क्या सड़क निर्माण के मानकों और गुणवत्ता की जांच की गई थी?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर में होने वाले विकास कार्यों का उद्देश्य केवल सड़क बनाकर औपचारिकता पूरी करना है या नागरिकों को लंबे समय तक टिकाऊ सुविधाएं देना भी है?

जनता को चाहिए टिकाऊ सड़क, बार-बार निर्माण नहीं

सड़क बनने के दो महीने के भीतर ही उसकी ऊपरी परत का खराब होना निश्चित रूप से चिंता का विषय है। भले ही अब ठेकेदार अपने खर्च पर सड़क को दोबारा तैयार कर रहा है, लेकिन इससे निर्माण के दौरान हुई कमियों और निगरानी व्यवस्था से जुड़े सवाल खत्म नहीं हो जाते।

नगर निगम को चाहिए कि वह केवल खराब सड़क की मरम्मत तक सीमित न रहे, बल्कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता, जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी और ठेका कंपनी की जवाबदेही भी सुनिश्चित करे।

आखिर जनता के टैक्स से होने वाले विकास कार्यों में ऐसी स्थिति क्यों बने कि नई सड़क बनने के कुछ ही समय बाद दोबारा निर्माण की नौबत आ जाए? बिलासपुर के नागरिकों को विकास के दावों से ज्यादा मजबूत और टिकाऊ सड़कें चाहिए।