
शिकायतों का समाधान हुआ या सिर्फ पोर्टल पर कर दिया गया बंद?
विभागीय समीक्षा में अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान दर्ज शिकायतों के निपटारे में गंभीर खामियां सामने आईं। जांच में पाया गया कि एल-1, एल-2 और एल-3 स्तर पर कई शिकायतों को बंद तो कर दिया गया, लेकिन उनके समाधान से संबंधित पर्याप्त जानकारी पोर्टल पर दर्ज नहीं की गई।
शिकायत बंद करते समय यह स्पष्ट नहीं किया गया कि समस्या के समाधान के लिए क्या कार्रवाई हुई, स्थल निरीक्षण में क्या सामने आया और शिकायतकर्ता को क्या जानकारी दी गई। विभाग ने इसे शासकीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही मानते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।
तीन अधीक्षण अभियंता, पांच कार्यपालन अभियंता और पांच एसडीओ शामिल
कारण बताओ नोटिस पाने वाले 13 अधिकारियों में तीन अधीक्षण अभियंता, पांच कार्यपालन अभियंता और पांच अनुविभागीय अधिकारी शामिल हैं।
एल-1 स्तर के अधिकारी:
अतुल राज पेगवार — राष्ट्रीय राजमार्ग उप संभाग, बिलासपुर
राजेश कुमार बाजपेयी — बेमेतरा
जगदीश प्रसाद — पेंड्रा
अशोक कुमार हरियाले — सेतु उप संभाग, दुर्ग
सोनल ढालेन्द्र — पाटन
एल-2 स्तर के अधिकारी:
केशव प्रसाद लहरे — बेमेतरा संभाग
घासीराम जांगड़े — कोरबा संभाग
रोशन कुमार साहू — राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग, बिलासपुर
प्यारे लाल पैकरा — सारंगढ़ संभाग
प्रज्ञा नंद — कांकेर संभाग
एल-3 स्तर के अधिकारी:
डी.के. नेताम — मंडल क्रमांक-2, रायपुर
अर्पणा चौरपगार — दुर्ग मंडल
महादेव लहरे — राष्ट्रीय राजमार्ग मंडल, बिलासपुर
शिकायत बंद करने के लिए अब देनी होगी कार्रवाई की पूरी जानकारी
विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शिकायत को बंद करने से पहले उसके निराकरण से जुड़ी जरूरी जानकारियां दर्ज करना अनिवार्य है। इसमें स्थल निरीक्षण के निष्कर्ष, की गई या प्रस्तावित कार्रवाई, कार्रवाई की तारीख अथवा निर्धारित समय-सीमा और शिकायतकर्ता को दी गई सूचना का विवरण शामिल होना चाहिए।
यदि शिकायत किसी दूसरे विभाग से संबंधित है, तो उसे संबंधित विभाग को भेजने की जानकारी या अपने विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर होने का स्पष्ट कारण भी दर्ज करना होगा।
15 दिन में जवाब नहीं दिया तो हो सकती है एकतरफा कार्रवाई
PWD ने सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने या स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर नियमानुसार एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है।
इस कार्रवाई के जरिए विभाग ने साफ संदेश दिया है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत को केवल पोर्टल पर बंद करना पर्याप्त नहीं है। आम नागरिक की समस्या का वास्तविक समाधान करना और कार्रवाई का स्पष्ट विवरण दर्ज करना भी अधिकारियों की जिम्मेदारी है।


