13 अक्टूबर से जारी है अनिश्चितकालीन हड़ताल
जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले के पटवारी 13 अक्टूबर से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसके चलते जिले के राजस्व विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।
बिलासपुर, बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर और कोटा के अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम) ने अपने-अपने क्षेत्रों के हड़ताली पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में उन्हें अपने हल्का मुख्यालय में उपस्थित होकर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।
अनुपस्थिति को माना जाएगा सेवा में व्यवधान
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना हड़ताल पर रहना सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का उल्लंघन माना जा सकता है। यदि पटवारी निर्धारित समय में काम पर नहीं लौटते हैं तो उनके खिलाफ सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही हड़ताल के दौरान अनुपस्थिति की अवधि को सेवा में व्यवधान यानी 'ब्रेक इन सर्विस' घोषित किए जाने की चेतावनी भी दी गई है।
धान खरीदी से पहले किसानों की बढ़ी परेशानी
पटवारियों की हड़ताल का असर अब आम नागरिकों और किसानों के जरूरी कामों पर भी दिखाई देने लगा है। आगामी धान खरीदी की तैयारियों के बीच किसान पंजीयन, एग्रीस्टैक प्रमाणीकरण, डिजिटल फसल सर्वे और गिरदावरी जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
इसके अलावा नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन तथा जाति, आय और निवास प्रमाणपत्रों के लिए आवश्यक राजस्व प्रतिवेदन भी लंबित हैं।
चक्रवाती तूफान से फसल नुकसान का सर्वे भी प्रभावित
हाल ही में आए चक्रवाती तूफान और खराब मौसम के कारण कई क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में प्रभावित किसानों की फसलों का सर्वेक्षण और नुकसान का आकलन भी महत्वपूर्ण है। पटवारियों की अनुपस्थिति के चलते राहत एवं मुआवजे से संबंधित प्रक्रियाओं में देरी की आशंका बढ़ गई है।
पटवारी संघ ने संवाद से समाधान निकालने की रखी मांग
राजस्व पटवारी संघ के प्रदेश संयोजक बृजेश राजपूत ने प्रशासन के सख्त रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जब तक पटवारियों की लंबित और जायज मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से दबाव बनाने के बजाय संवाद स्थापित कर समाधान निकालने की अपील की है।
वहीं एसडीएम आकांक्षा त्रिपाठी ने कहा है कि धान खरीदी और राहत सर्वेक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में निर्धारित समय में काम पर नहीं लौटने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल प्रशासन के अंतिम अल्टीमेटम के बाद पटवारियों के अगले कदम पर नजरें टिकी हुई हैं। अब देखना होगा कि 48 घंटे की समयसीमा के भीतर पटवारी काम पर लौटते हैं या आंदोलन जारी रखते हैं।

