कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कृषि विभाग और फसल बीमा कंपनी के अधिकारियों की आकस्मिक बैठक लेकर प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फसलों को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन कर पात्र किसानों को राहत सहायता और फसल बीमा का लाभ दिलाया जाए। इसके लिए बीमा कंपनी को सर्वे टीमों की संख्या बढ़ाने और आगामी दिनों में काम पूरा करने को कहा गया है।
बीमा नहीं कराने वाले किसानों को भी राहत का प्रावधान
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फसल बीमा नहीं कराने वाले किसानों को भी राहत से वंचित नहीं होना पड़ेगा। ऐसे किसानों की फसल क्षति का सर्वे राजस्व विभाग द्वारा कराया जाएगा। इसके बाद राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के प्रावधानों के तहत पात्रता के अनुसार सहायता के प्रकरण तैयार किए जाएंगे।
सर्वे कार्य में तेजी लाने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे का अनुभव रखने वाले युवाओं की भी मदद ली जाएगी। जिले में चालू खरीफ सीजन के दौरान एचडीएफसी एर्गो कंपनी के माध्यम से लगभग 47 हजार किसानों ने फसल बीमा कराया है।
72 घंटे के भीतर देनी होगी फसल नुकसान की सूचना
कृषि विभाग ने बीमित किसानों के लिए जरूरी जानकारी भी जारी की है। सहायक संचालक कृषि शशांक शिंदे के मुताबिक, पकने के बाद काटकर खेत या खलिहान में रखी धान की फसल बारिश के पानी से खराब होती है तो बीमित किसानों को नियमानुसार बीमा लाभ मिल सकता है। इसके लिए नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर दर्ज कराना जरूरी है।
किसान टोल फ्री नंबर 14447, व्हाट्सऐप नंबर 7065514447 अथवा अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विकास अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
खड़ी फसल गिरने पर भी होगा नुकसान का आकलन
अत्यधिक बारिश और तूफान के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल के पौधे गिरने की स्थिति में फसल कटाई प्रयोगों से प्राप्त परिणामों के आधार पर नियमानुसार सहायता निर्धारित की जाएगी। कृषि विभाग ने प्रभावित बीमित किसानों से अपील की है कि वे निर्धारित समय-सीमा में नुकसान की सूचना जरूर दर्ज कराएं।
प्रशासन ने कृषि विभाग, राजस्व विभाग और बीमा कंपनी को आपसी समन्वय के साथ सर्वे पूरा करने को कहा है, ताकि प्रभावित किसानों को राहत दिलाने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।

