बिलासपुर। शहर में सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान और तंबाकू उत्पादों की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के कई इलाकों में कथित तौर पर सार्वजनिक स्थानों के आसपास खुलेआम सिगरेट, गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पाद बेचे जा रहे हैं। वहीं, स्कूल-कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों के आसपास भी तंबाकू उत्पादों की बिक्री होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि नियम-कानून होने के बावजूद इनके पालन की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग आखिर कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहे हैं?
नियम बने, लेकिन जमीन पर पालन कितना?
सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान को प्रतिबंधित करने और तंबाकू उत्पादों की बिक्री को नियंत्रित करने के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। इसके बावजूद शहर में कई स्थानों पर लोग खुलेआम धूम्रपान करते दिखाई देने और दुकानों में तंबाकू उत्पादों की बिक्री जारी रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, शहर में इस समस्या पर नियंत्रण के लिए पहले भी समितियां बनाई गईं और निजात अभियान के माध्यम से लोगों को नशे से दूर रखने का प्रयास किया गया। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद तंबाकू उत्पादों की बिक्री और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान की समस्या पूरी तरह नियंत्रित होती नजर नहीं आ रही है।
स्कूल-कॉलेजों के आसपास भी बिक्री पर सवाल
तंबाकू उत्पादों की बिक्री को लेकर सबसे गंभीर चिंता शैक्षणिक संस्थानों के आसपास की स्थिति है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में भी तंबाकू उत्पाद बेचे जा रहे हैं। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो यह नियमों के उल्लंघन का गंभीर मामला होगा।
कम उम्र के बच्चों और किशोरों को नशे से दूर रखना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। स्कूल-कॉलेजों के आसपास सिगरेट, गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पाद आसानी से उपलब्ध होने से विद्यार्थियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में केवल जागरूकता अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाली दुकानों पर नियमित निगरानी और कार्रवाई भी जरूरी है।
सरकारी कार्यालयों के आसपास भी दुकानें संचालित होने का दावा
प्रकाशित रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री जारी है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के सामने भी तंबाकू उत्पादों की बिक्री होने की बात सामने आई है।
यदि संबंधित स्थानों पर नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो यह संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। हालांकि, इन स्थानों की मौजूदा स्थिति और संबंधित दुकानों के विरुद्ध कार्रवाई की जानकारी आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
निजात अभियान के बावजूद क्यों नहीं रुक रही बिक्री?
बिलासपुर में पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा नशे के खिलाफ निजात अभियान चलाया गया है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक करना और नशे की समस्या पर नियंत्रण की दिशा में काम करना रहा है। इसके बावजूद तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी अभियान की सफलता के लिए जागरूकता के साथ-साथ नियमित निरीक्षण, नियमों का पालन और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक होती है। ऐसे में संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अभियान केवल प्रचार तक सीमित न रहे, बल्कि उसका असर बाजारों, सार्वजनिक स्थलों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास भी दिखाई दे।
क्या कहता है कानून?
सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 (COTPA) के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित है। इसके अलावा, धारा 6 के प्रावधानों के अनुसार, शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध है।
अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि वे प्रतिबंधित क्षेत्र में संचालित दुकानों की जांच करें और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
अब कार्रवाई का इंतजार
बिलासपुर में तंबाकू उत्पादों की बिक्री और सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान से जुड़े मामलों को लेकर अब निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाने की जरूरत है। विशेष रूप से स्कूल-कॉलेजों के आसपास नियमित जांच, प्रतिबंधित क्षेत्रों की पहचान, दुकानदारों को नियमों की जानकारी और उल्लंघन पर कार्रवाई जरूरी है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या शहर में कोटपा कानून का सख्ती से पालन कराया जाएगा, या सार्वजनिक स्थानों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री का मुद्दा यूं ही बना रहेगा?

