बिलासपुर। शहर में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और सरकारी योजनाओं की निगरानी को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) की समीक्षा में 4.03 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 16 विकास कार्य निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद भी अधूरे पाए गए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने संबंधित कार्यपालन अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। वहीं, नगर निगम की वेबसाइट लंबे समय से अपडेट नहीं होने और बजट से संबंधित जानकारी अद्यतन नहीं होने का मुद्दा भी पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

सात वित्तीय वर्षों के विकास कार्यों की समीक्षा में सामने आई स्थिति

जानकारी के अनुसार, सूडा कार्यालय ने वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2024-25 तक स्वीकृत विकास कार्यों की समीक्षा की। इसमें बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र के 16 कार्य ऐसे पाए गए, जो निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी अधूरे हैं। इनकी कुल स्वीकृत लागत 4.03 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

समीक्षा में यह भी सामने आया कि संबंधित कार्य ऑनलाइन पोर्टल पर निर्माणाधीन दर्ज हैं, लेकिन उनकी वर्तमान स्थिति और प्रगति से जुड़ी जानकारी अपडेट नहीं की गई है। ऐसे में विकास कार्यों की वास्तविक प्रगति की निगरानी और जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

तीन करोड़ रुपये का मांगलिक भवन भी अधूरा

लंबित कार्यों में डॉ. बीआर आंबेडकर सर्वसमाज मांगलिक भवन का निर्माण प्रमुख है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में स्वीकृत इस परियोजना के लिए तीन करोड़ रुपये निर्धारित किए गए थे। इसके अलावा वर्ष 2018-19 में स्वीकृत उद्यानों और पुष्पवाटिकाओं के विकास से संबंधित 15 अन्य कार्य भी अधूरे बताए गए हैं।

इन परियोजनाओं में चौबे कॉलोनी, सरकंडा सहित विभिन्न बस्तियों और कॉलोनियों के उद्यान विकास कार्य शामिल हैं। महामाया विहार, गायत्री नगर, विद्या नगर, कपिल नगर, देवकीनंदन दीक्षित नगर, साईधाम कॉलोनी तर्वा, गंगानगर, वसुंधरा नगर और अयोध्या नगरी जैसे क्षेत्रों के कार्यों का भी उल्लेख किया गया है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रत्येक परियोजना के अधूरे रहने के अलग-अलग कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं।

नगर निगम की वेबसाइट लंबे समय से अपडेट नहीं, बजट की जानकारी भी सवालों के घेरे में

विकास कार्यों में देरी के बीच नगर निगम की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारियों को लेकर भी सवाल उठते हैं। यदि वेबसाइट लंबे समय से अपडेट नहीं की गई है और बजट से संबंधित जानकारी भी अद्यतन नहीं है, तो आम नागरिकों के लिए नगर निगम की वित्तीय स्थिति, विकास योजनाओं, स्वीकृत राशि और खर्च से जुड़ी जानकारी प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है।

नगर निगम जैसी महत्वपूर्ण स्थानीय निकाय की वेबसाइट नागरिकों के लिए सूचना का प्रमुख माध्यम होती है। इसके जरिए बजट, विकास कार्यों, योजनाओं, निविदाओं और प्रशासनिक फैसलों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है। ऐसे में वेबसाइट पर नियमित अपडेट नहीं होने से पारदर्शिता और सूचना की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका रहती है।

हालांकि, बजट की जानकारी किस वित्तीय वर्ष से अपडेट नहीं हुई है और वेबसाइट के किन-किन हिस्सों में बदलाव नहीं किया गया है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इसलिए इस पहलू पर नगर निगम का आधिकारिक पक्ष और वेबसाइट पर उपलब्ध रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे।

तीन दिन में जवाब देने का निर्देश, कार्रवाई की चेतावनी

सूडा ने संबंधित कार्यपालन अभियंता को नोटिस प्राप्त होने के तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही लंबित कार्यों की वास्तविक और नवीनतम स्थिति ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करने को कहा गया है।

विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समयसीमा में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

विकास कार्यों के साथ सूचना व्यवस्था दुरुस्त करना भी जरूरी

करोड़ों रुपये की लागत वाले विकास कार्यों का समय पर पूरा होना जितना जरूरी है, उतना ही महत्वपूर्ण उनकी प्रगति और खर्च से संबंधित जानकारी का सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना भी है। ऐसे में अधूरे कार्यों की समयबद्ध समीक्षा के साथ नगर निगम की वेबसाइट और बजट संबंधी रिकॉर्ड को नियमित रूप से अपडेट करने की आवश्यकता है।

अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी नोटिस का क्या जवाब देते हैं, लंबित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं और नगर निगम अपनी ऑनलाइन सूचना व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए क्या कार्रवाई करता है।