बिलासपुर। जिला प्रशासन के कामकाज में कसावट लाने और महत्वपूर्ण विभागों की निगरानी को और मजबूत करने के लिए बिलासपुर कलेक्ट्रेट में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर पांच वरिष्ठ अधिकारियों के प्रभार और जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था के तहत राजस्व, कानून-व्यवस्था, भू-अर्जन, जनदर्शन, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और न्यायालयीन मामलों जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जिम्मेदारी अलग-अलग अधिकारियों को सौंपी गई है।
प्रशासनिक स्तर पर किए गए इस बदलाव को कलेक्ट्रेट के कामकाज को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खास तौर पर लंबे समय से लंबित मामलों की निगरानी, आम लोगों की शिकायतों के निराकरण और शासन की प्राथमिकताओं से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा कराने पर जोर दिया गया है।
उमेश पटेल को वित्त से लेकर भू-अर्जन और सीएसआर तक की जिम्मेदारी
संयुक्त कलेक्टर उमेश पटेल को महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उन्हें वित्त एवं स्थापना शाखा के साथ भू-अर्जन, भू-बंटन और मुख्यमंत्री की घोषणाओं की मॉनिटरिंग का दायित्व दिया गया है। इसके अलावा सीएसआर से संबंधित कार्यों की निगरानी के लिए उन्हें नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इन विभागों से जुड़े मामलों की प्रगति पर अब उनके स्तर से निगरानी रखी जाएगी।
रजनी भगत संभालेंगी शहर की कानून-व्यवस्था से जुड़े अहम मामले
संयुक्त कलेक्टर रजनी भगत को शहर की कानून-व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। उनके प्रभार में सिविल लाइन, कोतवाली और सरकंडा सहित प्रमुख थाना क्षेत्रों से संबंधित कानून-व्यवस्था की निगरानी रहेगी। इसके साथ ही चिप्स, लोक सेवा केंद्र और बाल श्रम शाखा से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई है।
शहर में कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए यह जिम्मेदारी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रशासन की कोशिश रहेगी कि संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ शिकायतों और मामलों का समय पर निराकरण हो।
शिव कुमार कंवर को नजूल, भू-अभिलेख और रिकॉर्ड रूम
डिप्टी कलेक्टर शिव कुमार कंवर को नजूल, भू-अभिलेख और रिकॉर्ड रूम का प्रभार सौंपा गया है। जमीन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या में आवेदन और प्रकरण सामने आते हैं। ऐसे में इन शाखाओं की निगरानी सीधे अधिकारी स्तर पर होने से लंबित मामलों के निराकरण में तेजी आने की उम्मीद है।
भवानी शंकर साव संभालेंगे राजस्व और हाई कोर्ट से जुड़े मामले
डिप्टी कलेक्टर भवानी शंकर साव को राजस्व, परीक्षा और राहत शाखा की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही हाई कोर्ट में शासन के पक्ष से जुड़े मामलों की निगरानी का महत्वपूर्ण दायित्व भी उन्हें सौंपा गया है।
नई व्यवस्था के तहत वे प्रतिदिन सुबह 10 बजे हाई कोर्ट पहुंचकर राजस्व और जीएडी से संबंधित याचिकाओं की स्थिति की जानकारी लेंगे। इसके बाद संबंधित मामलों की जानकारी नोडल अधिकारी और अपर कलेक्टर को उपलब्ध कराई जाएगी। इससे न्यायालयीन मामलों की पैरवी और उनकी प्रगति की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है।
सालिक राम गुप्ता के जिम्मे जनदर्शन और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन
डिप्टी कलेक्टर सालिक राम गुप्ता को आम जनता से सीधे जुड़े मामलों की जिम्मेदारी दी गई है। उनके प्रभार में जनदर्शन, जनसमस्या निवारण शिविर, टीएल प्रकरण और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में लंबित शिकायतों के निराकरण की निगरानी रहेगी।
प्रशासनिक व्यवस्था में यह जिम्मेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जनदर्शन और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से बड़ी संख्या में नागरिक अपनी समस्याएं और शिकायतें प्रशासन तक पहुंचाते हैं। अब इन मामलों की प्रगति और निराकरण की नियमित निगरानी की जाएगी।
अधिकारी अनुपस्थित रहे तो भी नहीं रुकेगा काम
नई प्रशासनिक व्यवस्था में अधिकारियों की अनुपस्थिति के दौरान कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए लिंक अधिकारियों की व्यवस्था भी निर्धारित की गई है। प्रत्येक महत्वपूर्ण दायित्व के लिए प्रथम और द्वितीय लिंक अधिकारी तय किए गए हैं। इसका उद्देश्य अधिकारी के अवकाश, दौरे या अन्य प्रशासनिक व्यस्तता के दौरान भी संबंधित शाखा का काम सुचारू रूप से जारी रखना है।
कलेक्ट्रेट में हुए इस फेरबदल के बाद अब अलग-अलग शाखाओं की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से निर्धारित हो गई है। प्रशासन का फोकस लंबित मामलों को कम करने, आम जनता की शिकायतों का तेजी से निराकरण करने और शासन की योजनाओं व घोषणाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग पर रहेगा। आने वाले दिनों में इस नई व्यवस्था का असर राजस्व, जनशिकायत और न्यायालयीन मामलों के निपटारे में कितना दिखाई देता है, यह देखने वाली बात होगी।

