बिलासपुर। शहर की सड़कों पर यातायात सुरक्षा और रखरखाव को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकंडा–सीपत रोड पर टूटे डिवाइडर वाहन चालकों के लिए खतरा बने हुए हैं। सीएमएचओ कार्यालय से देवनंदन नगर तक करीब एक किलोमीटर के हिस्से में 12 जगह डिवाइडर क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इनकी स्थिति पिछले तीन से चार वर्षों से बनी हुई है। इसके बावजूद मरम्मत नहीं होने से इस मार्ग पर आवागमन करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
डिवाइडर का मुख्य उद्देश्य सड़क पर वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करना, विपरीत दिशाओं से आने वाले वाहनों को अलग रखना और दुर्घटनाओं की आशंका को कम करना है। लेकिन जब यही डिवाइडर जगह-जगह से टूट जाते हैं, तो सड़क पर यातायात व्यवस्था प्रभावित होने लगती है। सरकंडा–सीपत रोड की मौजूदा स्थिति भी इसी तरह की समस्या की ओर इशारा कर रही है।
एक किलोमीटर के दायरे में 12 जगह टूटे डिवाइडर
सीएमएचओ कार्यालय से देवनंदन नगर तक लगभग एक किलोमीटर के हिस्से में 12 स्थानों पर डिवाइडर क्षतिग्रस्त होने का मामला सामने आया है। एक ही मार्ग पर इतनी जगहों पर डिवाइडर टूटे होना सड़क सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय है। इन स्थानों पर डिवाइडर की संरचना प्रभावित होने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सड़क के बीच डिवाइडर टूटने से कुछ वाहन चालक सुविधानुसार रास्ता बदलने या दूसरी ओर जाने के लिए इन खुले हिस्सों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे पीछे या विपरीत दिशा से आ रहे वाहन चालकों को अचानक स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में तेज रफ्तार, कम दृश्यता और यातायात के दबाव के दौरान दुर्घटना की आशंका बढ़ सकती है।
तीन से चार साल से बनी हुई है समस्या
इस मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि डिवाइडरों की खराब स्थिति पिछले तीन से चार वर्षों से बनी होने की बात कही जा रही है। यदि इतने लंबे समय से सड़क के इन हिस्सों की मरम्मत नहीं हुई है, तो यह नियमित रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
सड़कों पर छोटे स्तर की टूट-फूट को समय रहते ठीक करना जरूरी होता है, क्योंकि लंबे समय तक मरम्मत नहीं होने पर समस्या और गंभीर हो सकती है। डिवाइडर के क्षतिग्रस्त हिस्सों की अनदेखी से न केवल यातायात का अनुशासन प्रभावित होता है, बल्कि वाहन चालकों और अन्य राहगीरों के लिए भी जोखिम पैदा हो सकता है।
रात के समय बढ़ सकती है परेशानी
दिन के समय वाहन चालक सड़क की स्थिति देखकर सावधानी बरत सकते हैं, लेकिन रात के समय टूटे डिवाइडर को पहचानना अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है। यदि किसी स्थान पर वाहन चालक अचानक दिशा बदलता है या डिवाइडर के टूटे हिस्से से दूसरी ओर निकलने की कोशिश करता है, तो आसपास से गुजर रहे वाहनों के साथ टक्कर की आशंका पैदा हो सकती है।
विशेष रूप से व्यस्त मार्गों पर सड़क की संरचना दुरुस्त रखना जरूरी है। डिवाइडर के क्षतिग्रस्त हिस्सों को ठीक करने के साथ जरूरत के अनुसार चेतावनी संकेत और सुरक्षा संबंधी इंतजाम भी किए जाने चाहिए, ताकि मरम्मत होने तक वाहन चालक सतर्क रह सकें।
हादसे के बाद जागेगा जिम्मेदार विभाग?
सरकंडा–सीपत रोड पर एक किलोमीटर के भीतर 12 जगह डिवाइडर टूटने और वर्षों से मरम्मत नहीं होने की बात सामने आने के बाद सवाल उठता है कि सड़क के नियमित निरीक्षण और रखरखाव की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। यदि किसी सड़क पर लंबे समय तक ऐसी स्थिति बनी रहती है, तो समय रहते उसकी पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाना जरूरी है।
शहर में बेहतर यातायात व्यवस्था के लिए केवल नई सड़कें बनाना ही पर्याप्त नहीं है। मौजूदा सड़कों, डिवाइडरों और अन्य बुनियादी सुविधाओं का नियमित रखरखाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। समय पर मरम्मत होने से संभावित दुर्घटनाओं को रोकने और लोगों को सुरक्षित आवागमन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
मरम्मत की मांग, सुरक्षा को मिले प्राथमिकता
सरकंडा–सीपत रोड पर टूटे डिवाइडरों की समस्या का समाधान जल्द किया जाना जरूरी है। संबंधित विभाग को क्षतिग्रस्त स्थानों का निरीक्षण कराकर मरम्मत सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि सड़क पर वाहनों की आवाजाही व्यवस्थित हो सके और दुर्घटनाओं की आशंका कम की जा सके।
लोगों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में कार्रवाई किसी दुर्घटना के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले होनी चाहिए। अब देखना होगा कि लंबे समय से बनी इस समस्या के समाधान के लिए कब ठोस कदम उठाए जाते हैं।

