बिलासपुर। शारदीय नवरात्रि के प्रथम पावन दिवस पर मां अरपा के प्रति श्रद्धा, आस्था और समर्पण का अनूठा संगम देखने को मिला। अरपा अर्पण महाअभियान ‘जन आंदोलन’ के तत्वावधान में मां अरपा की महाआरती का आयोजन भक्तिमय वातावरण में किया गया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और ‘जय-जय अरपा मैया’ के जयकारों से अरपा तट गूंज उठा। आयोजन में मां अरपा के साथ-साथ नदियों के संरक्षण, पौधारोपण और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश भी दिया गया।

पांच वेदपाठी आचार्यों ने संपन्न कराई महाआरती

निर्धारित मुहूर्त शाम 7:15 बजे मां अरपा की महाआरती प्रारंभ हुई। पांच वेदपाठी आचार्यों द्वारा विधि-विधान से आरती संपन्न कराई गई। गुग्गुल और हवन सामग्री की सुगंध से अरपा तट का वातावरण आध्यात्मिक हो उठा। भजन मंडली ने श्री ललित जी के नेतृत्व में भक्ति गीत प्रस्तुत किए। वहीं, महाअभियान परिवार की ओर से दीपों के माध्यम से ‘जय-जय अरपा मैया’ की आकर्षक प्रस्तुति दी गई।

महाआरती के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने बिलासपुर सहित समस्त विश्व की शांति, सुख, स्वास्थ्य और सदाचरण की कामना की।

संत रामरूपदास महात्यागी ने बताया प्रकृति सेवा का महत्व

संत रामरूपदास महात्यागी जी, रामाश्रय श्री हरिहर क्षेत्र मदकू एवं प्रदेशाध्यक्ष, सर्व संत समाज छत्तीसगढ़ ने जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रकृति को मां का स्वरूप बताया। उन्होंने प्रकृति की सेवा को सबसे बड़ी सेवा बताते हुए पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि नदियों, पेड़-पौधों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारी आस्था और जीवनशैली का भी अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।

‘नदियों में कचरा न डालें, पौधों की भी करें देखभाल’

अरपा अर्पण महाअभियान ‘जन आंदोलन’ के अध्यक्ष एवं संस्थापक श्याम मोहन दुबे ने नागरिकों से अपील की कि नदियों में कचरा, फूल-माला अथवा अन्य पूजन सामग्री न डालें। उन्होंने कहा कि नदी को स्वच्छ बनाए रखने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

उन्होंने पेड़-पौधों पर विज्ञापन लगाने के लिए पिन और कील का इस्तेमाल नहीं करने की अपील भी की। उनके अनुसार, इससे पौधों को नुकसान पहुंचता है और वे धीरे-धीरे कमजोर होकर सूख सकते हैं। उन्होंने कहा कि पौधारोपण करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करना भी है।

डॉ. श्रीश मिश्रा ने दिया बदलाव का संदेश

डॉ. श्रीश मिश्रा ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रेरक संदेश देते हुए कहा, “आप गंदा न करें, सफाई हो जाएगी। आप पेड़-पौधों को न काटें, हरियाली आ जाएगी और आप अपने आप को बदलें, सब अपने आप बदल जाएंगे।”

उनका संदेश व्यक्तिगत जिम्मेदारी और सकारात्मक बदलाव की आवश्यकता पर केंद्रित रहा।

जनभागीदारी से आगे बढ़ रहा अरपा संरक्षण का अभियान

आयोजकों के अनुसार, मां अरपा की महाआरती वर्षों से आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य धार्मिक आस्था को जनजागरूकता से जोड़ना और लोगों को नदियों के संरक्षण के लिए प्रेरित करना है। बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु इस आयोजन के माध्यम से मां अरपा सहित सभी नदियों की स्वच्छता, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हैं।

आयोजन को सफल बनाने में जय पाठक, दिग्विजय पाठक, सीमा चतुर्वेदी, पराग यादव, वर्षा ताम्रकार, डिगेश्वरी, डॉ. सुजाता पाण्डेय, डॉ. रवि पटेल, गौरव तिवारी, जयेश तिवारी, राजा समदरिया, विशाल धीवर, पवन श्रीवास्तव, जयंत श्रीवास्तव, बसंत जायसवाल, राजकुमार जायसवाल, संजय जायसवाल, विठ्ठल पटेल, अनिल यादव, आशुतोष शर्मा, आशुतोष तिवारी सहित महाअभियान परिवार के सदस्यों का योगदान रहा।

महाआरती के माध्यम से श्रद्धालुओं ने यह संदेश दिया कि मां अरपा के प्रति सच्ची श्रद्धा केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि नदी को स्वच्छ रखने, पेड़-पौधों को बचाने और प्रकृति की रक्षा करने में भी निहित है।