बिलासपुर। लाखों रुपये खर्च कर नई इलेक्ट्रिक कार खरीदने के बाद भी अगर बार-बार सर्विस सेंटर के चक्कर काटने पड़ें और खराबी दूर न हो, तो ग्राहक की परेशानी का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां टाटा पंच ईवी में लगातार तकनीकी खराबी आने और करीब 10 बार सर्विसिंग के बावजूद समस्या दूर नहीं होने पर उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को बड़ा झटका दिया है। राज्य उपभोक्ता आयोग ने टाटा मोटर्स की अपील खारिज करते हुए कार की पूरी कीमत लौटाने के पहले दिए गए आदेश को बरकरार रखा है।

₹16.25 लाख की कार, लेकिन 200 किलोमीटर भी नहीं चली!

मामला बिलासपुर निवासी डॉ. स्वप्न कुमार दत्ता की टाटा पंच ईवी (Empowered Plus S LR ACFC) से जुड़ा है। उन्होंने 22 फरवरी 2024 को अधिकृत डीलर जेडी ऑटोनेशन से यह इलेक्ट्रिक कार खरीदी थी। इसके लिए उन्होंने कुल 16 लाख 25 हजार 604 रुपये चुकाए थे।

कार खरीदने के कुछ ही समय बाद उसमें तकनीकी समस्याएं सामने आने लगीं। वाहन के एयर कंडीशनिंग सिस्टम में खराबी, वेंटिलेटेड सीट में परेशानी और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आईं। सबसे बड़ी परेशानी कार की बैटरी रेंज को लेकर थी।

कंपनी की ओर से एक बार चार्ज करने पर 421 किलोमीटर तक चलने का दावा किया गया था, जबकि डॉक्टर के अनुसार कार मुश्किल से 200 किलोमीटर भी नहीं चल पा रही थी। इसके अलावा वाहन के सेंसर में खराबी और चलते-चलते कार बंद होने जैसी समस्याओं ने उनकी परेशानी बढ़ा दी।

10 बार सर्विसिंग, फिर भी नहीं मिली राहत

कार में बार-बार खराबी आने के बाद उसे कई बार सर्विस सेंटर ले जाना पड़ा। करीब 10 बार सर्विसिंग कराए जाने के बावजूद शिकायतों का स्थायी समाधान नहीं हो सका।

नई कार खरीदने के बाद बेहतर सुविधा और भरोसेमंद सफर की उम्मीद करने वाले डॉक्टर को लगातार तकनीकी परेशानियों का सामना करना पड़ा। आखिरकार उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया और वाहन की कीमत वापस दिलाने की मांग की।

जिला उपभोक्ता आयोग ने सुनाया था बड़ा फैसला

डॉ. दत्ता की शिकायत पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने मामले की सुनवाई की। आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए टाटा मोटर्स को कार की पूरी कीमत 16,25,604 रुपये लौटाने का आदेश दिया था।

इसके साथ ही डॉक्टर को मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए 25 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपये देने का भी निर्देश दिया गया। आदेश के अनुसार, निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर देय राशि पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज का प्रावधान भी रखा गया था।

जिला उपभोक्ता आयोग के फैसले को टाटा मोटर्स ने राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में चुनौती दी। कंपनी की अपील पर आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गौतम चौरड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों और सर्विसिंग से संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा की।

सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि वाहन में बार-बार तकनीकी समस्याएं सामने आने के बावजूद कंपनी और डीलर शिकायतों को गलत साबित करने के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ राय अथवा साक्ष्य पेश नहीं कर सके।

इसके बाद राज्य आयोग ने कंपनी की अपील खारिज कर दी और जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखा। इस फैसले से डॉक्टर को कार की पूरी कीमत के साथ निर्धारित क्षतिपूर्ति और वाद व्यय पाने का रास्ता साफ हुआ।