शादी डॉट कॉम के संस्थापक ने UPI संचालन लागत और सरकारी सहायता के अंतर का मुद्दा उठाया; ₹2,000 से ऊपर के कुछ मर्चेंट UPI भुगतान पर 15 अक्टूबर से 0.4% MDR लागू होने की घोषणा।

भारत के डिजिटल भुगतान सिस्टम UPI को लंबे समय तक मुफ्त और आसान रखने के मॉडल पर अब नई बहस शुरू हो गई है। शादी डॉट कॉम के संस्थापक अनूपम मित्तल ने कहा है कि UPI इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने की लागत और उसे मिलने वाली सहायता के बीच बड़ा अंतर है। उनके अनुसार, केवल एक ही नेटवर्क पर निर्भर रहने के बजाय प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना जरूरी है।

सोशल मीडिया पर साझा किए गए बयान में मित्तल ने कहा कि टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से डेटा की कीमतें कम हुईं; इसी तरह डिजिटल भुगतान में भी नए खिलाड़ियों और नेटवर्क को अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सब्सिडी मॉडल पर लगातार निर्भर रहने के बजाय सिस्टम के लिए टिकाऊ राजस्व व्यवस्था बनानी होगी।

संसदीय समिति ने भी हाल में UPI इकोसिस्टम की वार्षिक संचालन लागत करीब ₹20,700 करोड़ और सरकारी आवंटन करीब ₹2,000 करोड़ बताए जाने पर चिंता जताई थी। समिति ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था के लिए दीर्घकालिक और आत्मनिर्भर राजस्व मॉडल की जरूरत बताई है।

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इसी बीच, 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के कुछ व्यापारी UPI भुगतान पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने की घोषणा हुई है। छोटे QR-आधारित व्यापारियों, जिनकी मासिक UPI प्राप्ति ₹1 लाख तक है, को इससे छूट दी गई है। ग्राहक से यह शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए और व्यक्ति-से-व्यक्ति UPI ट्रांसफर पहले की तरह मुफ्त रहेंगे।

MDR पर बहस का मुख्य सवाल यही है कि डिजिटल भुगतान की सुविधा बनाए रखते हुए बैंकों, पेमेंट ऐप्स और तकनीकी ढांचे की लागत कौन उठाएगा। मित्तल का तर्क है कि अधिक प्रतिस्पर्धा और मजबूत विकल्पों से शुल्क कम रखने तथा इनोवेशन बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह नीति-स्तर का सुझाव है; नया UPI नेटवर्क बनाने या अनुमति देने पर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।