नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की तीन भाषा नीति को लेकर चल रही सुनवाई के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 के विद्यार्थियों को राहत देने की संभावना पर गंभीरता से विचार करने को कहा है। अदालत ने केंद्र और CBSE से मौजूदा शैक्षणिक सत्र में कक्षा 6 में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को इस व्यवस्था से राहत देने का विकल्प तलाशने को कहा है।
तीन भाषा नीति के तहत विद्यार्थियों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना है, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं। इसी व्यवस्था को लेकर छात्रों, अभिभावकों और कुछ संस्थानों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गई हैं। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ कर रही है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने विशेष रूप से कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए राहत की संभावना पर विचार करने का सुझाव दिया। अदालत की चिंता यह है कि नई व्यवस्था लागू करने के दौरान छोटे विद्यार्थियों पर अनावश्यक शैक्षणिक दबाव नहीं पड़ना चाहिए।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इस सुझाव पर संबंधित अधिकारियों से चर्चा की जाएगी और सरकार इस संबंध में अपना पक्ष रखेगी। मामले की अगली सुनवाई अब 17 सितंबर को होगी।
सुनवाई के दौरान अंग्रेजी भाषा की स्थिति को लेकर भी अदालत ने सवाल उठाए। कोर्ट ने यह जानना चाहा कि नई व्यवस्था में अंग्रेजी को भारतीय भाषा माना जाएगा या विदेशी भाषा की श्रेणी में रखा जाएगा। यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नीति के अनुसार तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना आवश्यक है।

CBSE की नई भाषा व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के अनुरूप तैयार की गई है। इसके तहत तीसरी भाषा को लेकर स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, पाठ्य सामग्री और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस बात पर जोर दे चुका है कि नीति लागू करते समय विद्यार्थियों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ना चाहिए और स्कूलों के पास पर्याप्त संसाधन एवं योग्य शिक्षक होने चाहिए।
फिलहाल कक्षा 6 के विद्यार्थियों को स्थायी या अंतिम छूट का आदेश नहीं दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को राहत की संभावना पर विचार करने को कहा है। अब सबकी नजर 17 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर है, जहां सरकार और CBSE की ओर से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।

