शारदीय नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तृतीय स्वरूप माँ चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माँ चंद्रघंटा साहस, शक्ति, शांति और निडरता की प्रतीक हैं। उनकी उपासना से भक्तों को जीवन में आने वाली कठिनाइयों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।

पंडित अनिल पाण्डेय के अनुसार, माँ चंद्रघंटा की पूजा में श्रद्धा, पवित्रता और सकारात्मक विचारों का विशेष महत्व है। भक्तों को विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हुए माता से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करनी चाहिए।

माँ चंद्रघंटा का प्रिय भोग

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ चंद्रघंटा को दूध, दूध से बनी मिठाइयाँ और खीर अर्पित करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार माता को भोग लगाकर प्रसाद वितरित कर सकते हैं।

इन मंत्रों का करें जाप

नवरात्रि के तृतीय दिवस पूजन का शुभ मुहूर्त रात्रि 11.27 तक है

माँ चंद्रघंटा की आराधना के दौरान भक्त श्रद्धापूर्वक इन मंत्रों का जाप कर सकते हैं—

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः।

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं चन्द्रघण्टायै नमः।

मंत्र जाप के दौरान मन को शांत रखते हुए माता का ध्यान करना चाहिए। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई आराधना भक्तों में आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार करती है।

चौथे दिन पूजा के दौरान रखें इन बातों का ध्यान

पंडित अनिल पाण्डेय के अनुसार, नवरात्रि के चौथे दिन भी भक्तों को पूजा-पाठ के साथ अपने आचरण और विचारों की पवित्रता पर ध्यान देना चाहिए।

- सकारात्मक विचार रखें: मन में अच्छे विचार बनाए रखें और क्रोध से बचने का प्रयास करें।

- जरूरतमंदों की मदद करें: अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, फल या अन्य आवश्यक वस्तुएँ दान करें।

- स्वच्छता को दें महत्व: पूजा स्थल को साफ रखें और धार्मिक अनुष्ठानों में दिखावे के बजाय श्रद्धा को प्राथमिकता दें।

- स्वास्थ्य का रखें ध्यान: व्रत रखने वाले लोग अपने स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार फलाहार करें।

माँ चंद्रघंटा देती हैं साहस और धैर्य का संदेश

पंडित अनिल पाण्डेय ने बताया कि माँ चंद्रघंटा की आराधना का संदेश केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। उनका स्वरूप हमें सिखाता है कि जीवन में शांति और धैर्य बनाए रखते हुए अन्याय तथा कठिन परिस्थितियों का साहस के साथ सामना करना चाहिए। विपरीत परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास बनाए रखना और दूसरों के प्रति करुणा का भाव रखना ही इस उपासना का महत्वपूर्ण संदेश है।

नवरात्रि का पर्व आस्था, संयम, सेवा और सकारात्मकता का प्रतीक है। ऐसे में माँ चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना के साथ जरूरतमंदों की सहायता करना और अपने व्यवहार में अच्छे गुणों को अपनाना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

जय माता दी! माँ चंद्रघंटा सभी भक्तों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और साहस का संचार करें।