बिलासपुर/मुंगेली। गरीबों के हक के सरकारी राशन पर सेंध लगाने वाले गिरोह के खिलाफ मुंगेली पुलिस की कार्रवाई ने सिर्फ चोरी की वारदातों का खुलासा नहीं किया, बल्कि सरकारी चावल की कथित कालाबाजारी के एक बड़े नेटवर्क को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘ऑपरेशन बाज’ के तहत पुलिस ने राशन दुकानों में चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की निशानदेही पर करीब 100 क्विंटल चावल, 16 कट्टी शक्कर, नकदी, पिकअप वाहन और चोरी में इस्तेमाल सामान समेत करीब 10 लाख रुपये का माल बरामद किया गया है।

पुलिस की जांच में यह बात सामने आने की जानकारी है कि राशन दुकानों से चोरी किया गया चावल पहले घुठेली ले जाया जाता था। यहां कथित तौर पर बोरियां बदलने के बाद माल को बिलासपुर के अलग-अलग इलाकों में पहुंचाया जाता था। यही बिंदु अब पूरे मामले को मुंगेली से आगे बिलासपुर तक ले आया है।

मुंगेली में चोरी... बिलासपुर में कथित खपत?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि चोरी का सरकारी चावल बिलासपुर तक पहुंच रहा था, तो आखिर इसे खरीद कौन रहा था? इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी चावल क्या बिना किसी नेटवर्क या खरीदारों के खपाया जा सकता है?

बिलासपुर में सरकारी राशन के चावल की कथित खरीद-फरोख्त को लेकर लंबे समय से तरह-तरह की चर्चाएं सामने आती रही हैं। आरोप है कि कुछ राशन दुकानों में हितग्राहियों को चावल देने के बजाय नगद राशि देकर सरकारी चावल को अलग बोरियों में पलटने और बाद में आसपास के इलाकों की राइस मिलों तक पहुंचाने का खेल चलता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

सुबह वेयरहाउस से निकला ट्रक... फिर कहां गया चावल?

इस पूरे मामले में एक कथित रसूखदार व्यापारी को लेकर भी गंभीर दावे सामने आए हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक व्यापारी ने दावा किया कि वेयरहाउस से निकलने वाले सरकारी चावल के ट्रकों में से कुछ को कथित तौर पर रास्ते में निर्धारित स्थान के बजाय निजी गोदामों अथवा अन्य स्थानों पर खाली करवाया जाता है।

दावा यह भी है कि इसके बाद चावल को सफेद बोरियों में पलटकर छोटी गाड़ियों के जरिए अलग-अलग राइस मिलों तक पहुंचाया जाता है।

यदि ये दावे सही पाए जाते हैं तो सवाल सिर्फ कालाबाजारी का नहीं, बल्कि सरकारी चावल की निगरानी और उसके परिवहन की पूरी व्यवस्था पर खड़ा होगा।

जीपीएस पर भी ‘खेल’ का दावा

मामले में जीपीएस ट्रैकिंग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। एक व्यापारी के अनुसार, सरकारी चावल लेकर निकले कुछ वाहनों को कथित तौर पर बीच रास्ते में अन्य स्थानों पर ले जाकर माल उतारने और बाद में जीपीएस लोकेशन के अनुरूप वाहन की आवाजाही दिखाने का खेल किया जा सकता है।

हालांकि जीपीएस से छेड़छाड़ अथवा इस तरह की किसी व्यवस्था के दुरुपयोग की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

तीन राशन दुकानें बनीं निशाना

मुंगेली पुलिस के मुताबिक बेलखुरी की शासकीय उचित मूल्य दुकान से 76 कट्टी चावल, कलारजेवरा से 25 कट्टी चावल और पालचुवा की दुकान से करीब 60-70 बोरी चावल तथा 16 बोरी शक्कर चोरी की गई थी।

लगातार हो रही वारदातों को गंभीरता से लेते हुए मुंगेली एसपी भोजराम पटेल के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।

10 अगस्त को पुलिस ने खिलेश कौशिक को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आने की बात पुलिस ने कही।

इसके बाद पुलिस ने खिलेश कौशिक, राजू श्रीवास, महेन्द्र निषाद और बंटी उर्फ रवि पाहूजा को गिरफ्तार किया। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश जारी बताई जा रही है।

200 कट्टी चावल बरामद... अब खरीदारों की बारी?

पुलिस ने कार्रवाई में 200 कट्टी चावल, 16 कट्टी शक्कर, 24 हजार रुपये नकद, पिकअप वाहन, 83 प्लास्टिक बोरियां और चोरी में इस्तेमाल औजार बरामद किए हैं।

लेकिन इस कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है—

चावल चुराने वाले पकड़े गए, लेकिन माल खरीदने वाले कौन हैं?

यदि जांच में सरकारी चावल के बिलासपुर कनेक्शन की पुष्टि होती है, तो यह पता लगाना बेहद जरूरी होगा कि चोरी का माल किसे बेचा गया, किसने खरीदा, किसके गोदाम में रखा गया और आखिर यह चावल किन राइस मिलों या व्यापारियों तक पहुंचा।

यानी पुलिस के सामने अब सिर्फ ‘चोर कौन?’ का सवाल नहीं, बल्कि ‘खरीदार कौन?’ और ‘नेटवर्क कितना बड़ा?’ का सवाल भी खड़ा है।

मुंगेली पुलिस पहुंची बिलासपुर, स्थानीय निगरानी पर सवाल

इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि मुंगेली पुलिस की जांच कथित तौर पर बिलासपुर तक पहुंची है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि सरकारी चावल की खरीद-फरोख्त का नेटवर्क वास्तव में बिलासपुर तक फैला है, तो स्थानीय पुलिस और खाद्य विभाग की निगरानी में यह गतिविधियां कैसे चलती रहीं?

क्या विभागों को इसकी भनक नहीं लगी?

या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई?

इन सवालों का जवाब अब संबंधित विभागों की जांच से ही सामने आएगा।

‘बड़े चावल चोरों’ का सिंडिकेट?

जांच के दौरान पुटपुरा और सिलपहरी सहित अन्य स्थानों से भी सरकारी चावल चोरी के सुराग मिलने की बात सामने आई है। वहीं लोरमी में खाद और कोकही में कीटनाशक चोरी की घटनाओं से भी संभावित कड़ियां जोड़कर जांच किए जाने की जानकारी है।

अगर इन सभी मामलों के बीच कोई संगठित कनेक्शन सामने आता है, तो यह महज राशन दुकान में चोरी का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी खाद्यान्न की सप्लाई चेन में सेंध लगाने वाले बड़े नेटवर्क का मामला बन सकता है।

गरीब के निवाले पर मुनाफे का खेल?

सरकारी राशन गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए होता है। उसकी चोरी या कालाबाजारी सिर्फ सरकारी संपत्ति की चोरी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर उन परिवारों के अधिकार को प्रभावित करती है जिनके लिए यह खाद्यान्न आवंटित किया जाता है।

मुंगेली पुलिस की कार्रवाई ने चोरी करने वालों तक पहुंच जरूर बनाई है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच की अगली कड़ी बिलासपुर के कथित खरीदारों, गोदामों और राइस मिलों तक कब पहुंचती है।