बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में तहसीलदार के निलंबन से जुड़े एक मामले में हाईकोर्ट ने शासन के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामला तहसीलदार माया अंचल लहरे के निलंबन से जुड़ा है। अदालत ने राजस्व विभाग के सचिव और अवर सचिव समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

जानकारी के मुताबिक माया अंचल लहरे वर्तमान में कांकेर जिले में तहसीलदार के पद पर पदस्थ हैं। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 16 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया था। निलंबन की कार्रवाई उनके पूर्व पदस्थापना स्थल पुसौर, जिला रायगढ़ से जुड़े एक राजस्व प्रकरण को लेकर की गई थी।

बताया गया है कि वर्ष 2020 में पुसौर क्षेत्र की एक जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने संबंधी आदेश पारित किया गया था। संबंधित भूमि राजस्व अभिलेख में शासकीय छोटे झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज थी। इस आदेश को लेकर बाद में छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल में पुनरीक्षण प्रकरण सामने आया।
राजस्व मंडल द्वारा अगस्त 2025 में मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध प्रशासनिक एवं विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेजने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद तहसीलदार माया अंचल लहरे ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
इसी याचिका में हाईकोर्ट ने 17 फरवरी 2026 को अंतरिम राहत देते हुए राजस्व मंडल के उस हिस्से पर रोक लगा दी थी, जिसमें उनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करने का निर्देश दिया गया था। याचिका अभी भी अदालत में लंबित है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने अदालत में दलील दी कि जब संबंधित विभागीय जांच के निर्देश पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक पहले से प्रभावी थी, तो उन्हीं तथ्यों और आरोपों के आधार पर बाद में निलंबन का आदेश कैसे जारी किया गया। मामले की सुनवाई 10 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की पीठ के समक्ष हुई।
अदालत ने फिलहाल निलंबन आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव व अवर सचिव, छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल बिलासपुर, संबंधित संभागायुक्त, रायगढ़ और कांकेर के कलेक्टर तथा संबंधित अनुविभागीय अधिकारी सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
हालांकि हाईकोर्ट की यह राहत अंतरिम है। इसका अर्थ यह नहीं है कि जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव से जुड़े मूल आरोपों पर अदालत ने अंतिम फैसला दे दिया है या तहसीलदार को पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया है। मामले में शासन का जवाब आने के बाद आगे की सुनवाई होगी।
अब इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि जब संबंधित प्रकरण में हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश पहले से प्रभावी था, तो उसके बाद निलंबन की कार्रवाई किस आधार पर की गई और आदेश जारी करने से पहले विभाग ने न्यायालयीन स्थिति का किस स्तर तक परीक्षण किया था। इन सवालों पर शासन का जवाब मामले की अगली दिशा तय कर सकता है।

