बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी के खिलाफ विभागीय या न्यायिक कार्यवाही लंबित होने मात्र से उसके पेंशन संबंधी लाभ पूरी तरह रोके नहीं जा सकते। कोर्ट ने कहा कि नियमों के तहत पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारी को कम से कम प्रोविजनल पेंशन और निर्धारित सेवानिवृत्ति लाभ दिया जाना जरूरी है।

मामले में याचिकाकर्ता कर्मचारी को सेवानिवृत्ति की निर्धारित आयु पूरी होने के बाद सेवा से रिटायर किया गया था। इसके बावजूद उसे पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ जारी नहीं किए गए। कर्मचारी की ओर से पेंशन रोकने की कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।

सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के प्रावधानों का उल्लेख किया गया। नियमों के अनुसार, यदि किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी के खिलाफ विभागीय या न्यायिक कार्यवाही लंबित है, तब भी उसे निर्धारित परिस्थितियों में प्रोविजनल पेंशन और पात्र ग्रेच्युटी का भुगतान किया जा सकता है।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पेंशन कर्मचारी का वैधानिक अधिकार है और इसे केवल निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही रोका या वापस लिया जा सकता है। केवल किसी मामले के लंबित रहने के आधार पर पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों को पूरी तरह रोक देना नियमों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि कर्मचारी के मामले में नियमों के अनुसार प्रोविजनल पेंशन और पात्र पेंशन संबंधी लाभों की प्रक्रिया पूरी कर उनका भुगतान किया जाए। हालांकि, यह भुगतान लंबित न्यायिक मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।

इस फैसले से उन सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके खिलाफ विभागीय या न्यायिक प्रक्रिया लंबित होने के कारण पेंशन अथवा अन्य सेवानिवृत्ति लाभ अटक जाते हैं। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम पेंशन संबंधी अधिकार संबंधित मामलों के अंतिम परिणाम के अनुसार तय किए जा सकेंगे।

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर भी राज्य में लागू पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ से संबंधित नियम उपलब्ध हैं।