बिलासपुर | छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर एक बार फिर विवादों में है। संस्थान की एक पीजी छात्रा ने आई विभाग की एचओडी समेत दो महिला डॉक्टरों पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रा ने मामले में सीधे कलेक्टर से शिकायत कर निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के बाद मामला संस्थान के स्तर से आगे बढ़कर प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है।

इस पूरे घटनाक्रम ने सिम्स में वरिष्ठ चिकित्सकों और जूनियर डॉक्टरों के बीच कार्य संबंधों, विभागीय शिकायतों के निपटारे और संस्थान के भीतर कामकाज के माहौल को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

HOD और महिला डॉक्टर पर लंबे समय से परेशान करने का आरोप

मिली जानकारी के अनुसार, पीजी छात्रा ने अपनी शिकायत में आई विभाग की एचओडी डॉ. सुचिता सिंह और डॉ. प्रभा सोनवानी का नाम लिया है। छात्रा का आरोप है कि दोनों डॉक्टरों की ओर से उसे लंबे समय से मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। शिकायत में कथित तौर पर बार-बार प्रताड़ित किए जाने की बात कही गई है।

छात्रा ने इस स्थिति को अपने लिए मानसिक परेशानी का कारण बताते हुए मामले की जांच कराने की मांग की है। उसने प्रशासन से आग्रह किया है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्षता से जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों के संबंध में दोनों डॉक्टरों का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में मामले में किसी को दोषी ठहराना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।

सिम्स प्रबंधन के बजाय सीधे कलेक्टर तक पहुंची शिकायत

इस मामले में खास बात यह है कि पीजी छात्रा ने अपनी शिकायत सीधे बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल के समक्ष रखी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने सिम्स प्रबंधन को मामले की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए।

प्रशासन के निर्देश के बाद सिम्स प्रबंधन ने जांच समिति गठित की है। समिति को शिकायत से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी गई है।

शिकायत सीधे जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद अब पूरे मामले में जांच की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है। समिति की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि छात्रा की शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने आते हैं और आगे किस तरह की कार्रवाई की आवश्यकता होगी।

जांच समिति की जिम्मेदारी गायनिक विभाग की डॉक्टर को

मामले की जांच के लिए गठित समिति की प्रमुख की जिम्मेदारी गायनिक विभाग की ओपीडी से जुड़ी डॉ. संगीता जोगी को सौंपी गई है। सिम्स प्रबंधन की ओर से समिति को जल्द से जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

अब जांच समिति के सामने शिकायत में बताए गए घटनाक्रम, संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की जिम्मेदारी है। जांच के दौरान सभी संबंधित पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना भी निष्पक्ष प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि मामले में आगे विभागीय कार्रवाई की जरूरत है या नहीं।

सिम्स में विभागीय शिकायतों के निपटारे पर फिर सवाल

सिम्स प्रदेश का एक महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थान है, जहां मरीजों के उपचार के साथ मेडिकल शिक्षा और चिकित्सकीय प्रशिक्षण की जिम्मेदारी भी निभाई जाती है। ऐसे संस्थान में वरिष्ठ चिकित्सकों, रेजिडेंट डॉक्टरों और पीजी विद्यार्थियों के बीच पेशेवर संबंधों का स्वस्थ होना बेहद जरूरी है।

वर्तमान शिकायत ने एक बार फिर इस बात पर ध्यान खींचा है कि मेडिकल संस्थानों में सामने आने वाली विभागीय शिकायतों का निपटारा किस तरह किया जाता है और शिकायतकर्ताओं को निष्पक्ष सुनवाई का भरोसा कैसे दिया जाता है।

यदि किसी संस्थान में प्रताड़ना या अनुचित व्यवहार की शिकायत सामने आती है, तो उसकी समयबद्ध और निष्पक्ष जांच जरूरी होती है। वहीं, शिकायत में नामित व्यक्तियों के अधिकारों और उनके पक्ष को भी उचित महत्व दिया जाना चाहिए। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की जांच आवश्यक है।

सिम्स में पहले भी चिकित्सकों के बीच विवाद और कथित उत्पीड़न से जुड़े मामले चर्चा में आ चुके हैं। ऐसे में मौजूदा शिकायत की जांच और उसके निष्कर्ष संस्थान की कार्यप्रणाली के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होंगे।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

पीजी छात्रा की शिकायत के बाद जांच समिति गठित हो चुकी है और प्रबंधन ने जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में कौन से तथ्य सामने आते हैं और प्रबंधन उन तथ्यों के आधार पर क्या कदम उठाता है।

फिलहाल छात्रा की ओर से लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। जांच रिपोर्ट और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।