रायपुर | 1 नवंबर 2026 | जोहार न्यूज़

महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में बड़ी कार्रवाई: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने प्रमुख आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाने की कार्रवाई की है। जांच एजेंसियों के अनुसार, उसे रविवार, 1 नवंबर को भारत लाया गया। सोमवार, 2 नवंबर को रायपुर की विशेष CBI अदालत में उसकी पेशी प्रस्तावित है। अदालत में जांच एजेंसी पूछताछ के लिए पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग कर सकती है। हालांकि रिमांड की अवधि अदालत के आदेश के बाद ही तय होगी।

ओमान में कैसे पकड़ा गया सौरभ चंद्राकर?

महादेव ऑनलाइन बुक मामले की जांच कर रही भारतीय एजेंसियां लंबे समय से सौरभ चंद्राकर की तलाश कर रही थीं। उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग हासिल करने के लिए इंटरपोल का रेड नोटिस जारी कराया गया था। अक्टूबर 2024 में संयुक्त अरब अमीरात में उसके हिरासत में होने और प्रत्यर्पण के प्रयासों की खबरें सामने आई थीं। बाद में ओमान में उसकी मौजूदगी और हिरासत की जानकारी मिली। रॉयल ओमान पुलिस तथा भारतीय एजेंसियों के बीच समन्वय के बाद उसे भारत लाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

ओमान से भारत लाने की पूरी प्रक्रिया

किसी वांछित आरोपी को दूसरे देश से भारत लाना केवल पुलिस की गिरफ्तारी का मामला नहीं होता। इसके लिए संबंधित देश की कानूनी प्रक्रिया, प्रत्यर्पण संबंधी अनुरोध, आवश्यक दस्तावेज और दोनों देशों की एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी होता है। सौरभ चंद्राकर के मामले में भी भारतीय एजेंसियों ने ओमान के अधिकारियों के सामने लंबित मामलों और आरोपों से जुड़े दस्तावेज रखे। आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद CBI की टीम ने उसकी हिरासत प्राप्त की और भारत लेकर आई। मामले में ओमान सरकार और रॉयल ओमान पुलिस के सहयोग की बात भी सामने आई है।

अब रायपुर में कब होगी पेशी, कितने दिन की पीसी मिलेगी?

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक सौरभ चंद्राकर को 2 नवंबर 2026 को रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया जाना है। उससे पहले मेडिकल परीक्षण और आवश्यक ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। अदालत में CBI कथित नेटवर्क के संचालन, वित्तीय लेनदेन और अन्य आरोपियों के संबंध में पूछताछ के लिए पुलिस कस्टडी की मांग कर सकती है। अभी पुलिस कस्टडी (PC) की अवधि घोषित नहीं हुई है। अदालत ही तय करेगी कि रिमांड दी जाए या नहीं और यदि दी जाए तो कितने समय के लिए। इसलिए किसी निश्चित अवधि का दावा करना फिलहाल उचित नहीं होगा।

भिलाई से दुबई तक: कौन है सौरभ चंद्राकर?

सौरभ चंद्राकर का संबंध छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई से है। मीडिया रिपोर्टों में उसके शुरुआती जीवन का संबंध जूस के कारोबार से बताया गया है। बाद में उसका नाम रवि उप्पल के साथ महादेव ऑनलाइन बुक के संचालन में सामने आया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि विदेश में रहकर इन लोगों ने भारत समेत अनेक स्थानों पर अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क चलाया। इस मामले में स्थानीय एजेंटों, पैनल संचालकों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में रही है।

महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क कैसे काम करता था?

जांच एजेंसियों के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल और अन्य खेलों पर कथित अवैध सट्टेबाजी कराई जाती थी। आरोप है कि अलग-अलग वेबसाइट और पैनल के माध्यम से उपयोगकर्ताओं के खाते बनाए जाते थे, जबकि स्थानीय स्तर पर एजेंट भुगतान और संचालन का काम देखते थे। सट्टेबाजी से अर्जित कथित रकम को अनेक बैंक खातों और अन्य माध्यमों से स्थानांतरित करने के आरोपों की जांच भी की जा रही है। एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी रही हैं कि नेटवर्क से किसे कितना लाभ मिला और पैसा किन माध्यमों से आगे भेजा गया।

₹6,000 करोड़ के कथित नेटवर्क की जांच

यह मामला लगभग ₹6,000 करोड़ के कथित वित्तीय नेटवर्क के संदर्भ में राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग की अलग जांच करते हुए संपत्तियों पर कार्रवाई की। मार्च 2026 में एजेंसी ने लगभग ₹1,700 करोड़ मूल्य की संपत्तियों की अस्थायी कुर्की की जानकारी दी थी। इनमें विदेश की महंगी संपत्तियां भी शामिल बताई गई थीं। ये आंकड़े जांच एजेंसियों के आरोप और कार्रवाई के संदर्भ में हैं; इन्हें अदालत द्वारा अंतिम रूप से सिद्ध अपराध की राशि नहीं माना जाना चाहिए।

छत्तीसगढ़ में आगे क्या हो सकता है?

महादेव ऐप मामले की जड़ें भिलाई, दुर्ग और रायपुर से जुड़ी होने के कारण यह छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण खबर है। अब सौरभ चंद्राकर की भारत वापसी के बाद जांच एजेंसियों को कथित सट्टेबाजी नेटवर्क, स्थानीय संपर्कों, बैंक खातों और दूसरे आरोपियों की भूमिका पर आगे पूछताछ का अवसर मिल सकता है। हालांकि आगे की जांच और हिरासत से संबंधित हर कदम कानून तथा न्यायालय के आदेशों के अधीन होगा। अब सबकी नजर 2 नवंबर को रायपुर की विशेष CBI अदालत की कार्यवाही पर है।