बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर निगम में पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं के मामले में बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सात अभियंताओं को अंतरिम राहत देते हुए उनके खिलाफ प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई, कथित अधिक भुगतान की वसूली संबंधी निर्देशों और कारण बताओ नोटिस पर रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, दुर्ग कलेक्टर और भिलाई नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
29 निर्माण अनुबंधों की जांच में सामने आई गड़बड़ी
पूरा मामला भिलाई नगर निगम की परियोजना शाखा के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में कराए गए पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों से जुड़ा है। शहर की विभिन्न सड़कों, फुटपाथों और चौक-चौराहों पर पेवर ब्लॉक लगाने के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी करने के बाद ठेकेदारों को कार्यादेश जारी किए गए थे। इन कार्यों में नगर निगम की निधि के साथ-साथ 15वें वित्त आयोग के अनुदान का भी इस्तेमाल किया गया था।
निर्माण कार्य पूरे होने के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा निरीक्षण और सत्यापन किए जाने के उपरांत ठेकेदारों को भुगतान किया गया था। हालांकि, बाद में इन कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायत सामने आई, जिसके बाद मामले की जांच कराई गई।
21 अनुबंधों में मौके पर कम मिला निर्माण कार्य
शिकायत के बाद दुर्ग कलेक्टर ने 3 सितंबर 2026 को भिलाई नगर निगम के आयुक्त को पत्र जारी कर मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। जांच लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, दुर्ग के कार्यपालन अभियंताओं की संयुक्त टीम से कराई गई।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, कुल 29 अनुबंधों की जांच की गई। इनमें से 21 अनुबंधों में माप पुस्तिका में दर्ज निर्माण कार्य की मात्रा और मौके पर उपलब्ध वास्तविक निर्माण के बीच अंतर पाया गया। रिपोर्ट में कुल 16 लाख 85 हजार 457 रुपये के कथित अधिक भुगतान का उल्लेख किया गया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित कार्यों की माप दर्ज करने वाले अभियंताओं और कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा कथित अतिरिक्त भुगतान की राशि वसूलने की अनुशंसा की गई थी।
सात अभियंताओं को जारी किया गया था कारण बताओ नोटिस
कलेक्टर के पत्र के बाद भिलाई नगर निगम के मुख्य अभियंता ने सात अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इनमें उप अभियंता अर्पित बंजारे, चंदन निर्मल, श्वेता महेश्वर, पुरुषोत्तम सिन्हा, रीमा हुमने और कृष्ण कुमार जंघेल के अलावा सहायक अभियंता श्वेता वर्मा शामिल हैं।
कार्रवाई और वसूली संबंधी निर्देशों से असंतुष्ट अभियंताओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने अधिवक्ता सिबाशीष मिश्रा के माध्यम से याचिका प्रस्तुत कर विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया को चुनौती दी।
अभियंताओं ने उठाए प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर सवाल
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक ने पक्ष रखा। उनकी ओर से दलील दी गई कि संबंधित शिकायत की जांच के दौरान अभियंताओं को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई और राशि की वसूली के निर्देश पहले ही जारी कर दिए गए थे। ऐसे में बाद में कारण बताओ नोटिस जारी करना महज औपचारिकता बनकर रह गया। उन्होंने इस प्रक्रिया को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की।
हाईकोर्ट ने कार्रवाई और वसूली के निर्देशों पर लगाई रोक
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की एकल पीठ के समक्ष हुई। याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर विचार करते हुए अदालत ने दुर्ग कलेक्टर के 3 सितंबर 2026 के पत्र में उल्लिखित अनुशासनात्मक कार्रवाई और कथित अधिक भुगतान की वसूली संबंधी निर्देशों पर रोक लगा दी। इसके साथ ही मुख्य अभियंता द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पर भी रोक लगाई गई है।
अदालत ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, दुर्ग कलेक्टर, भिलाई नगर निगम के आयुक्त, मुख्य अभियंता और कार्यपालन अभियंता को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
अब संबंधित अधिकारियों के जवाब पर टिकी नजरें
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से सातों अभियंताओं को फिलहाल राहत मिली है। हालांकि, इस आदेश को मामले में अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं, जांच रिपोर्ट में सामने आए भुगतान के अंतर और संबंधित अभियंताओं की जिम्मेदारी को लेकर अभी अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं हुआ है।
अब संबंधित विभागीय अधिकारियों के जवाब और आगे की न्यायिक कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि मामले में अगला कदम क्या होगा। फिलहाल, भिलाई नगर निगम के पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और जांच प्रक्रिया को लेकर चर्चा में है।

