बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी से जुड़े मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। महिला योग प्रशिक्षक की शिकायत पर चल रही विभागीय जांच के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया है। राज्य शासन ने अदालत को बताया कि डांगी के खिलाफ 20 अप्रैल 2026 को ही आरोप-पत्र जारी किया जा चुका है। वहीं, शिकायतकर्ता की आपत्तियों के बाद विभागीय जांच के लिए जांच अधिकारी और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी भी बदल दिए गए हैं।

दीपांशु काबरा को मिली जांच की जिम्मेदारी

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से बताया गया कि 29 सितंबर 2026 को जारी आदेश के तहत आईपीएस अधिकारी दीपांशु विजय काबरा को विभागीय जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं, आईपीएस अधिकारी पारुल माथुर को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया गया है। इससे पहले जांच प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की निष्पक्षता को लेकर शिकायतकर्ता ने आपत्ति जताई थी।

महिला योग प्रशिक्षक ने लगाए थे गंभीर आरोप

यह मामला बिलासपुर निवासी एक महिला योग प्रशिक्षक की शिकायत से जुड़ा है। महिला ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2017 से 2025 के बीच रतनलाल डांगी ने अपने पद के प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए उन्हें कथित रूप से प्रताड़ित किया और अनुचित व्यवहार किया। शिकायत में अश्लील संदेश एवं तस्वीरें भेजने, पति के खिलाफ लंबित विभागीय जांच के दौरान आईफोन मांगने तथा मनचाही पदस्थापना के बदले पैसे मांगने जैसे आरोप भी शामिल हैं।

हालांकि, ये शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं। मामले में विभागीय जांच की प्रक्रिया जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

जांच अधिकारियों को बदलने हाईकोर्ट पहुंची थीं महिला

शिकायतकर्ता ने पहले नियुक्त जांच अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। महिला ने आरोप लगाया था कि जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रही है। उन्होंने जांच अधिकारियों को बदलने, किसी वरिष्ठ अधिकारी से मामले की जांच कराने और डांगी की छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान में स्थित कथित संपत्तियों की जांच कराने की मांग भी की थी।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ में हुई। अदालत ने राज्य शासन और पुलिस विभाग से जवाब मांगा था। शासन की ओर से आरोप-पत्र जारी होने तथा जांच अधिकारियों में बदलाव किए जाने की जानकारी पेश की गई।

विभागीय जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें

राज्य शासन की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी मिलने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया। अब विभागीय जांच की आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। आरोप-पत्र जारी होना अनुशासनात्मक कार्रवाई का हिस्सा है, इसे आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद ही मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।