कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा नगर निगम की जन्म-मृत्यु शाखा से सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां सरकारी दस्तावेजों में ऐसा खेल हुआ कि दो जीवित ग्रामीणों को कागजों पर मृत घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं, दोनों के नाम से बाकायदा मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए गए। करीब 23 साल पुराने इन प्रमाण पत्रों का खुलासा होने के बाद नगर निगम से लेकर पुलिस महकमे तक हलचल मच गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम की शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने दो आरोपियों रामशरण और अनिल कुमार के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

1997 में कागजों पर हुई मौत, 2003 में जारी कर दिए मृत्यु प्रमाण पत्र

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोसमंदा निवासी भोला राम और रामरतन को सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्शाया गया था। दस्तावेजों में भोला राम की मृत्यु 12 जून 1997 और रामरतन की मृत्यु 2 मई 1997 दर्ज की गई।

इन्हीं कथित मृत्यु विवरणों के आधार पर 5 सितंबर 2003 को कोरबा नगर निगम से दोनों के नाम पर मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। सवाल यह है कि आखिर जीवित व्यक्तियों को मृत घोषित करने के लिए ये दस्तावेज किसने तैयार किए और निगम की प्रक्रिया में इस गंभीर गड़बड़ी को कैसे अंजाम दिया गया?

सरकारी काम में आई परेशानी तो सामने आया वर्षों पुराना खेल

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब दोनों ग्रामीणों को अपने सरकारी कामकाज में परेशानियों का सामना करना पड़ा। अपने नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने इसकी पड़ताल शुरू की।

जांच-पड़ताल में पता चला कि उनके मृत्यु प्रमाण पत्र कोरबा नगर निगम से जारी हुए हैं। इसके बाद दोनों निगम कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से जानकारी मांगी। अधिकारियों ने बताया कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी की गई थी। वहीं, तहसील में भी इस संबंध में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।

प्रारंभिक जांच में फर्जी दस्तावेज, कूटरचित ज्ञापन और बैंक चालानों के जरिए मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए जाने की बात सामने आई है।

पहले भी सामने आ चुका है जीवित महिला का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र

नगर निगम की जन्म-मृत्यु शाखा पहले भी इसी तरह के विवादों में घिर चुकी है। इससे पहले शहर के एक प्रभावशाली व्यक्ति की जीवित बहू का फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए जाने का मामला सामने आया था।

लगातार ऐसे मामले सामने आने के बाद अब निगम के पुराने मृत्यु पंजीयन रिकॉर्ड, दस्तावेजों की जांच और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ऑफलाइन व्यवस्था में हुई गड़बड़ियों की अब होगी जांच?

बताया जा रहा है कि पहले मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया ऑफलाइन होती थी, जिसमें दस्तावेजों के सत्यापन में गड़बड़ी की आशंका अधिक रहती थी। बाद में ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने से प्रक्रिया को व्यवस्थित किया गया। हालांकि, पुराने रिकॉर्ड में दर्ज ऐसे मामलों की जांच अब बेहद जरूरी हो गई है।

पुलिस की जांच में खुलेगा राज, कौन था इस खेल का मास्टरमाइंड?

फिलहाल नगर निगम की शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने रामशरण और अनिल कुमार के खिलाफ अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि दोनों जीवित ग्रामीणों को मृत घोषित करने के लिए फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, प्रमाण पत्र जारी कराने में किन लोगों की भूमिका रही और क्या इस पूरे मामले में अन्य लोग भी शामिल थे।