बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध खनन के खिलाफ न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। अरपा नदी के नगोई घाट पर बिना अनुमति रेत उत्खनन के मामले में दोषी पाए गए जेसीबी ऑपरेटर को न्यायालय ने तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी पर अर्थदंड भी लगाया गया है।

अरपा नदी के नगोई घाट पर हो रहा था अवैध उत्खनन

मिली जानकारी के अनुसार, बिलासपुर जिले में अवैध खनन, परिवहन और खनिजों के अवैध भंडारण पर रोक लगाने के लिए प्रशासन द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर 15 जून 2025 से शुरू किए गए अभियान के तहत खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों ने कार्रवाई की थी।

इसी अभियान के दौरान 17 जून 2025 को अरपा नदी के नगोई घाट पर बिना अनुमति रेत उत्खनन का मामला सामने आया। यहां जेसीबी मशीन के जरिए रेत की खुदाई की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान जेसीबी वाहन क्रमांक CG 11 AB 3246 को लेकर मामला दर्ज किया गया और कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।

जेसीबी ऑपरेटर को सुनाई गई सजा

इस मामले में करगीरोड कोटा के डाकबंगला निवासी अनिल कुमार गौलिया, पिता तिलक राम गौलिया, के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। न्यायालय में सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी करार दिया गया।

न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2), सहपठित धारा 3(5) के तहत तीन साल के कठोर कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की संबंधित धाराओं के तहत 25 हजार रुपये का अतिरिक्त अर्थदंड भी लगाया गया।

अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई जारी

बिलासपुर जिले में अवैध उत्खनन, खनिजों के परिवहन और भंडारण पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत विभिन्न थानों में 66 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

नगोई घाट के इस मामले में न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा को अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। यह मामला अरपा नदी क्षेत्र में बिना अनुमति खनिज उत्खनन के खिलाफ चल रही कार्रवाई को भी रेखांकित करता है।