जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने मां-बच्चे के रिश्ते और मासूमों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां करीब 9 से 10 माह के एक बच्चे को कथित तौर पर 1 लाख 80 हजार रुपये में बेचने का मामला सामने आया है। इस मामले में बच्चे की मां समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पश्चिम बंगाल से बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया है।

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि इतनी कम उम्र के बच्चे को कथित तौर पर पैसों के बदले दूसरे लोगों को सौंप दिया गया और वह अपने मूल स्थान से दूर पश्चिम बंगाल तक पहुंच गया। हालांकि, बच्चे के सौदे से जुड़े पूरे घटनाक्रम, रकम के लेन-देन और प्रत्येक आरोपी की भूमिका को लेकर विस्तृत जानकारी पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

1.80 लाख रुपये में बच्चे की खरीद-फरोख्त का आरोप

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मामले में आरोप है कि बच्चे की मां ने ही रुपये के बदले अपने मासूम बच्चे का सौदा किया था। कथित सौदे की रकम 1 लाख 80 हजार रुपये बताई जा रही है। यह मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और बच्चे का पता लगाने के लिए कार्रवाई की।

मामला केवल एक बच्चे को दूसरे व्यक्ति के पास सौंपने तक सीमित नहीं है। यदि जांच में पैसों के बदले बच्चे की अवैध खरीद-फरोख्त की पुष्टि होती है, तो यह बाल संरक्षण और बच्चों को शोषण से बचाने से जुड़े कानूनों के तहत गंभीर मामला बनता है।

जशपुर से पश्चिम बंगाल तक कैसे पहुंचा मासूम?

कुनकुरी पुलिस की जांच के दौरान बच्चे के पश्चिम बंगाल में होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए वहां से करीब 9 से 10 माह के मासूम को बरामद कर लिया।

इतनी कम उम्र के बच्चे का दूसरे राज्य में मिलना इस मामले की गंभीरता को और बढ़ाता है। हालांकि, बच्चा किन-किन लोगों के पास रहा, उसे पश्चिम बंगाल तक ले जाने में किसकी क्या भूमिका थी और कथित सौदे की पूरी कड़ी क्या थी, इस संबंध में उपलब्ध प्रारंभिक रिपोर्ट में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

पुलिस की जांच इन पहलुओं पर महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे यह स्पष्ट होगा कि मामला किन परिस्थितियों में सामने आया और क्या इस घटनाक्रम में अन्य लोग भी शामिल थे।

मां समेत पांच आरोपी गिरफ्तार

इस मामले में पुलिस ने कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में बच्चे की मां, दो पुरुष और दो महिलाएं शामिल हैं।

पुलिस अब आरोपियों की भूमिका और कथित खरीद-फरोख्त से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। मामले में प्रत्येक आरोपी की भूमिका क्या रही और किसने बच्चे को किस परिस्थिति में अपने पास रखा, इसका खुलासा जांच के आगे बढ़ने के साथ हो सकता है।

फिलहाल इस मामले में सबसे राहत की बात यह है कि पुलिस ने मासूम को पश्चिम बंगाल से सकुशल बरामद कर लिया है। अब बच्चे की सुरक्षा, देखभाल और आगे की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है।

किशोर न्याय अधिनियम और BNS के तहत मामला दर्ज

प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, कुनकुरी थाना में इस मामले को लेकर अपराध दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम की धारा 81 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143(4) और 61(2) के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है।

इन धाराओं के तहत दर्ज प्रकरण में पुलिस की जांच और साक्ष्यों का विशेष महत्व होगा। आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगी। गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।

बच्चे की सुरक्षा और पूरे नेटवर्क का खुलासा अहम

इस घटना ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा, अवैध गोद लेने की प्रक्रिया और आर्थिक लेन-देन के माध्यम से बच्चों की कथित खरीद-फरोख्त जैसे गंभीर मुद्दों को सामने ला दिया है। कानूनी गोद लेने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार होती है। किसी बच्चे को पैसों के बदले अवैध तरीके से सौंपने का आरोप सामने आने पर मामले की गहन जांच आवश्यक हो जाती है।

अब इस प्रकरण में आगे की जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित सौदे में रकम का लेन-देन कैसे हुआ, बच्चे को पश्चिम बंगाल तक पहुंचाने में कौन-कौन शामिल था और बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी आगे किसे सौंपी जाएगी।

फिलहाल, जशपुर पुलिस की कार्रवाई में पश्चिम बंगाल से मासूम की सकुशल बरामदगी और पांच आरोपियों की गिरफ्तारी इस मामले के प्रमुख घटनाक्रम हैं। पूरे मामले की वास्तविक परिस्थितियां पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगी।